होली की बयार शुरू ढोलक मंजीरे और झींको की ताल पर थिरकेंगे होरियार

Raebareli Uttar Pradesh

प्रमोद राही

नगराम,लखनऊ। नगराम क्षेत्र में एक साल बाद फिर से फाग की धुन पर बजने के लिए ढोलक मंजीरों और झींको के बयार आ चुकी है बसंत पंचमी के दिन से शुरू होकर पूरे फागुन माह तक इनकी आवाज सुनाई देगी बसंत पंचमी में पहले सरस्वती पूजा होती है और फिर शाम से गांव की फागों की चौपाल में फागुनी बयार का रंग देखते ही बनता है। गांव में इन चौपालों को सजाये जाने की तैयारियां भी पूरी हो चुकी है इसके बाद लोग लगभग रोजाना एक निश्चित स्थान पर लोग जमा होते हैं और फागुनी बयार में फागुनी गीतो की धुन पर समा बांधते हैं। यह सिलसिला होली तक चलता है होली के दिन फाग गाने वालों की टोली गांव के प्रत्येक घर पर फाग के रंग अमीर गुलाल के साथ पहुंचती है और लोग नए परिधानो में एक दूसरे के घर जाकर लोग आपस में गले मिलते हैं और एक दूसरे को गुझिया व मिठाई खिलाकर होली की बधाइयां देते हैं।

क्या होता है बसंत पंचमी के दिन

बसन्त पंचमी के दिन फाग गाने वाले लोग पहले होलिका दहन के स्थल पर जाते हैं और सरस्वती पूजा करते हैं फिर होलिका दहन के स्थल पर एक टहनी ढांव चिन्ह लगाते हैं उसके बाद वहीं से पहले दिन फाग गाने का सिलसिला शुरू होता है जो होली के आठ दिन बाद आठव तक चलता है जवाबी कीर्तन और भजन की ही तरह अलग-अलग गाउन की जवाबी फाग गीत भी होता है। जिसे गांव के लोग धंवारी कहते हैं इसमें इलाके के कई चर्चित गढांअसलम नगर, अमवा मुर्तजापुर, नबीनगर, सुखलाल खेड़ा, हुसैनाबाद, करोरवा सहित कई गांव सामिल है फागुन के गीतों में होरी खेलैं रघुवीरा, सीता का रचा विवाह जनकपुर हरे बांस माडों छावा, सुमिरन करो आदि भवानिन का, सहित कई अन्य तरह के फागों के साथ इनकी शुरुआत होती है फाग की इस चौपाल में गांव के बुजुर्गों के अलावा नवयुवक तथा बच्चे भी हिस्सा लेते हैं बसंत पंचमी के दिन से होली के त्योहार के लिए रंगों की बयार शुरू हो जाती है और यह त्योहार होली के आठ दिन बाद तक चलता है गांव में फागो के गाए जाने का सिलसिला अभी से शुरू हो जाता है।

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