सरेनी में कांग्रेस की मजबूत दावेदार बनकर उभर रहीं सुधा द्विवेदी, समाजसेवा के दम पर बनाई अलग पहचान
रायबरेली / धैर्य शुक्ला : उत्तर प्रदेश की 182 सरेनी विधानसभा सीट पर आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज होने लगी हैं। इस बीच कांग्रेस की ओर से टिकट की प्रबल दावेदार मानी जा रहीं समाजसेविका सुधा द्विवेदी का नाम भी चर्चा के केंद्र में है। सामाजिक कार्यों के जरिए क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने वाली सुधा द्विवेदी की दावेदारी को लेकर राजनीतिक हलकों में नई संभावनाओं पर चर्चा हो रही है।
सुधा द्विवेदी की कार्यशैली का प्रमुख आधार जरूरतमंदों की सहायता और सामाजिक सरोकारों से जुड़ाव बताया जाता है। गरीब कन्याओं के विवाह में सहयोग, जरूरतमंद लोगों के इलाज की व्यवस्था में मदद, धार्मिक आयोजनों के माध्यम से सामाजिक समरसता का संदेश देना तथा विभिन्न सामाजिक कार्यक्रमों में सहभागिता उनके कार्यों के प्रमुख पहलुओं में शामिल हैं। उनके समर्थकों का मानना है कि समाजसेवा के क्षेत्र में उनकी सक्रियता उन्हें चुनावी राजनीति में एक अलग पहचान दिला सकती है।
सरेनी विधानसभा की राजनीति में पहले भी कई प्रमुख चेहरे अपनी भूमिका निभा चुके हैं। भारतीय जनता पार्टी के पूर्व विधायक धीरेंद्र बहादुर सिंह और पूर्व विधायक अशोक कुमार सिंह क्षेत्र की राजनीति के चर्चित नाम रहे हैं। वहीं, वर्तमान विधायक के रूप में समाजवादी पार्टी के देवेंद्र प्रताप सिंह राजा अजय का नाम सामने आता है। ऐसे राजनीतिक परिदृश्य में कांग्रेस के लिए मजबूत और जनसंपर्क रखने वाले चेहरे की तलाश अहम मानी जा रही है।
सुधा द्विवेदी की दावेदारी के पक्ष में उनके समर्थक सामाजिक सक्रियता, जरूरतमंद परिवारों के बीच पहुंच और जनसेवा के अनुभव को प्रमुख आधार बताते हैं। उनका मानना है कि यदि कांग्रेस नेतृत्व उन्हें अवसर देता है, तो वह अपने सामाजिक अनुभव को राजनीतिक मंच के माध्यम से व्यापक स्तर पर आगे बढ़ा सकती हैं।
हालांकि, कांग्रेस का आधिकारिक टिकट किसे मिलेगा, यह पार्टी नेतृत्व के निर्णय पर निर्भर करेगा। फिलहाल सरेनी की राजनीति में सुधा द्विवेदी की संभावित दावेदारी को लेकर चर्चाएं जारी हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि उनकी सामाजिक पहचान चुनावी समीकरणों को किस हद तक प्रभावित करती है और कांग्रेस नेतृत्व उन्हें किस रूप में देखता है।














