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EXCLUSIVE: ‘नमकीन जवानी रे’ फेम लिरिसिस्ट परम हंस मौर्य का जलवा, 300 एलबम के बाद अब बॉलीवुड और OTT की बारी!

EXCLUSIVE: ‘नमकीन जवानी रे’ फेम लिरिसिस्ट परम हंस मौर्य का जलवा, 300 एलबम के बाद अब बॉलीवुड और OTT की बारी!

मनोरंजन डेस्क, रायबरेली (विजय कुमार शुक्ला):
आजकल सोशल मीडिया रील्स हो या शादी-ब्याह की पार्टियाँ, हर तरफ एक ही गाना गूँज रहा है— ‘नमकीन जवानी रे’। इस गाने ने न सिर्फ चार्टबस्टर में अपनी जगह बनाई है, बल्कि इसके पीछे छिपे ‘शब्दों के जादूगर’ परम हंस मौर्य को रातों-रात नेशनल सेंसेशन बना दिया है। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रायबरेली के रहने वाले परम हंस मौर्य ने साबित कर दिया है कि अगर कलम में जान हो, तो एक छोटे शहर का युवा भी पूरे देश को अपनी धुन पर नचा सकता है।

शिल्पी राज की आवाज और मौर्य के शब्दों का ‘डेडली कॉम्बिनेशन’

सुपरहिट सिंगर शिल्पी राज की आवाज में सजे गाने ‘नमकीन जवानी रे’ की सफलता पर बात करते हुए परम हंस मौर्य की आँखों में एक अलग ही चमक दिखी। उन्होंने बताया, “एक गीतकार के लिए सबसे बड़ा अवॉर्ड यही है कि उसके लिखे शब्द लोगों की जुबान पर चढ़ जाएं। ‘नमकीन जवानी रे’ की सरलता और इसकी देसी वाइब ने इसे युवाओं से लेकर हर वर्ग का पसंदीदा बना दिया है।” आज यह गाना यूट्यूब और इंस्टाग्राम पर ट्रेंडिंग लिस्ट से हटने का नाम नहीं ले रहा है।

मंदिरों की शांति से लेकर म्यूजिक इंडस्ट्री के शोर तक का सफर

परम हंस मौर्य की सफलता का सफर किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। उनकी लेखनी की शुरुआत रायबरेली के शांत मंदिरों में बजने वाले भजनों से हुई थी। भगवान के चरणों में अर्पित किए गए उन गीतों ने उनकी कलम को वो गहराई दी, जो आज 300 से अधिक एलबम्स में नजर आती है। भोजपुरी और हिंदी संगीत जगत में अपनी धाक जमाने के बाद भी मौर्य काफी जमीन से जुड़े हुए हैं। वे कहते हैं, “मैं आज भी एक छात्र हूँ, और हर रोज संगीत की दुनिया से कुछ नया सीख रहा हूँ।”

रचनात्मकता का नया धमाका: अब फिल्मों और वेब सीरीज में मचेगी धूम

गीतकार परम हंस मौर्य केवल गानों तक ही रुकने वाले नहीं हैं। ‘नमकीन जवानी रे’ की ब्लॉकबस्टर सफलता के बाद अब वे हिंदी सिनेमा, शॉर्ट फिल्म्स और वेब सीरीज की दुनिया में कदम रखने जा रहे हैं। सूत्रों की मानें तो उनकी कई बड़ी प्रोजेक्ट्स पर बातचीत चल रही है, जहाँ उनकी लेखनी का एक नया और मॉडर्न अवतार दर्शकों को देखने को मिलेगा।

“मेरे शब्द सिर्फ मनोरंजन नहीं, समाज का आईना भी हैं।” > बातचीत के दौरान मौर्य ने जोर देकर कहा कि वे अपनी रचनाओं के जरिए युवाओं को प्रेरित करना चाहते हैं और समाज में सकारात्मक बदलाव लाना चाहते हैं।

शायराना अंदाज में ली विदाई

इंटरव्यू के आखिरी पलों में परम हंस मौर्य का असली ‘शायर’ जाग उठा। उन्होंने एक बेहद भावुक और गहरा ‘मुक्तक’ पढ़कर अपनी बात खत्म की, जिसने वहां मौजूद हर शख्स को तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया। उनकी ये संवेदनशीलता ही उन्हें भीड़ से अलग एक ‘स्टार लिरिसिस्ट’ बनाती है।
रायबरेली के इस लाल ने वाकई संगीत जगत में अपनी सफलता के झंडे गाड़ दिए हैं। फैंस को अब उनके अगले ‘धमाके’ का बेसब्री से इंतजार है!
रिपोर्टर: विजय कुमार शुक्ला
फोटो क्रेडिट: परम हंस मौर्य गैलरी

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