Thursday, February 2, 2023
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आपका मुद्दा : टीवी डिबेट में हेट स्पीच क्यों

श्रीसमाचार ऑनलाइन डेस्क : आजकल टीवी डिबेट में हेट स्पीच आम बात हो गयी है , मीडिया समाज का चौथा स्तभ है पर आजकल देखा जा रहा है टीवी डिबेट का स्तर काफी गिर गया है , मेहमानो को बुलाया जाता है ,  एंकर कुछ ख़ास मेहमानो को ही बोलने दिया जाता है।  अब समय आ गया है , बड़े बड़े मीडिया संस्थानों के खिलाफ लकीर सरकार खींचे।

भारत में 900 से ज़्यादा टीवी  चैनल है 

आजकल देखा जा रहा है लोगो का टीवी चैनल से झुकाव कम होता जा रहा है , लोग अपनी बात को सोशल मीडिया के सहारे प्रस्तुत कर रहे है। टीवी एंकर की भाषा अनियंत्रित हो गयी है , टीवी एंकर का स्तर काफी गिरा है , हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने नफरती भाषण के मुद्दे पर टीवी चैनलो पर की टिप्पणी , सरकार से दो हफ्ते में माँगा जवाब।  अब समय आ गया है चैनल के लिए कोई गाइडलाइन बने।

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मीडिया लोकतंत्र का चौथा स्तभ और टीवी एंकर की अहम जिम्मेदारी 

मीडिया पर निगरानी प्रणाली अगर लागू हो जाती है तो समाज के जनप्रतिनिधि और विपक्ष सरकार के ऊपर सवाल उठाने लगेंगे। सरकार ने हाल में एडवाइजरी मीडिया संस्थानों के लिए  जारी की थी।

  • खुली बहस होनी चाहिए ,लेकिन लाइन खींचनी चाहिए।
  • बेलगाम भाषा पर लगाम लगाना जरुरी।
  • प्रेस की स्वतंत्रता जरुरी , लेकिन सकारात्मक भूमिका जरुरी।
  • मीडिया लिटरेसी को बढ़ाने का करे काम।

टेलीविज़न की भूमिका 

  • टेलीविज़न की हमारे जीवन में महत्वपूर्ण भूमिका
  • टेलीविज़न पर पक्ष सकारात्मक और नकारात्मक दोनों लाया जाये।
  • टेलेविज़न ने मानव जीवन में काफी बदलाव किये है।
  • सूचना क्रांति सबसे बड़ा हथियार है।

हेट स्पीच पर सुप्रीम कोर्ट सख्त 

अब समय आ गया है सरकार सर्वसम्मति से कोई गाइडलाइन जारी करे , नहीं तो सुप्रीम कोर्ट को अपना आदेश लाना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने नफरती भाषण के मुद्दे पर टीवी चैनलों को लगाई कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने कहा है कि चैनलों पर बहस बेलगाम हो गई है। और सबसे ज्य़ादा हेट स्पीच टीवी चैनलों और सोशल मीडिया पर हैं। नफरती टिप्पणियों पर रोक लगाने की जिम्मेदारी एंकर की है, पर ऐसा नहीं हो रहा है। साथ ही कोर्ट ने पूछा है कि टीवी न्यूज से फैलने वाली नफरत पर केंद्र सरकार मूकदर्शक क्यों है? सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इस बात पर जोर दिया कि टीवी एंकरों की भूमिका सहित विजुअल मीडिया पर अभद्र भाषा हमारे समाज के ताने-बाने को जहरीला बनाता है। इसकी इजाजत नहीं दी जा सकती। टीवी चैनलों पर डिबेट्स के तरीकों की आलोचना करते हुए कोर्ट ने कहा कि ऐसी चर्चाओं के लिए कोई कार्यप्रणाली निर्धारित की जानी चाहिए, जिससे सुनिश्चित हो सके कि चैनल्स और एंकर नफरती भाषा को हवा न दें। जस्टिस केएम जोसेफ और जस्टिस हृषिकेश रॉय की पीठ अब मामले पर 23 नवंबर को सुनवाई करेंगी। निपटान के लिए सूचीबद्ध किया है। जस्टिस के.एम. जोसेफ और हृषिकेश रॉय ने कहा कि एक टीवी बहस के दौरान एंकर की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। यह देखना एंकर का कर्तव्य है कि प्रसारण के दौरान अभद्र भाषा का उपयोग नहीं हो। जस्टिस जोसेफ ने कहा, हमारा देश किस दिशा में जा रहा है? पीठ ने अभद्र भाषा के मुद्दे पर केंद्र के वकील की भी खिंचाई की। कोर्ट हेट स्पीच को नियंत्रित करने से जुड़ी रिट याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है।

 

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