Saturday, November 17, 2018

तीन लाख के आदर्श तालाब में उड़ रही धूल

Raeabreli

रायबरेली : प्रदेश सरकार समाप्त हो रहे तालाबों का पुराना स्वरूप बहाल कर उन्हें परम्परागत कसौटी पर खरा उतारने की बात कह रही है। वहीं लाखों रुपये व्यय कर जिन तालाबों को संरक्षित किया गया था उनका हाल बेहाल पड़ा है।

यदि दतौली गांव की बात करें तो यहां वर्ष 2009-10 में तीन लाख रुपये से अधिक की लागत से आदर्श तालाब बनवाया गया था। वर्तमान समय में गेट टूट कर ध्वस्त हो चुका है। चहार दीवारी गायब है। तालाब सूखा पड़ा है। यह तो उदाहरण मात्र है। लालगंज विकास खंड में 750 से अधिक तालाब हैं। जिनमें से 50 तालाबों को आदर्श तालाब घोषित कर उनकी सुरक्षा व सौंदर्यीकरण के नाम पर लाखों रुपये खर्च दिखाया गया। तालाबों की सुरक्षा के लिए चहारदीवारी बनवाकर लोहे का गेट लगवाया गया। चहारदीवारी पर लोहे के एंगल लगवाकर उसमें कटीले तारों की बेरीके¨डग कराई गयी। पुख्ता सीढि़यां, ओवरफ्लो होकर पानी बाहर बहने के लिए पाइप, सौंदर्यीकरण के नाम पर वृक्षारोंपण, बैठने के लिए बेंच आदि के नाम पर भी धन खर्च किया गया। लेकिन हकीकत बिल्कुल इसके विपरीत है। तालाबों में धूल उड़ रही है। लोहे के एंगल व गेट गायब हैं। जिससे सरकार की मंशा पर पूरी तरह से पानी फिर रहा है। भीषण गर्मी के बावजूद सभी तालाब सूखे पड़े हैं।

पानी सुलभ हो तो बुझ सकती प्यास

यदि इन तालाबों में पानी सुलभ हो तो मवेशी व पक्षी पानी पीकर अपनी प्यास बुझा सकते हैं। पास पड़ोस में अग्निकांड होने पर अग्निशमन दल को पानी सुलभ हो सकता है। भूगर्भ जलस्तर बढ़ाने में भी तालाबों में भरा पानी काफी मददगार साबित होता है। लेकिन जिम्मेदारों की उदासीनता के चलते तालाब बदहाल पड़े हैं। अधिकतर तालाबों पर तो भू माफियाओं ने कब्जा कर पुख्ता निर्माण तक करा लिए हैं।

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