आखिर चारागाह की जमीन क्यों नहीं खाली करा रहा प्रशासन

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भू माफियाओं के आगे बौना साबित हो रहा तहसील प्रशासन

टी.पी.यादव

महराजगंज,रायबरेली।   प्रदेश मेंं भजपा की सरकार बनते ही मुख्य मंत्री आदित्य नाथ योगी ने भू माफियाओं द्वारा कब्जाई गई चारागाह की सैकड़ो बीघा सुरक्षित भूमि को खाली करवाने के सख्त निर्देश दिए गए थे। जबकि तहसील प्रशासन ने टीम बनाकर सुरक्षित चरागाह की जमीन खाली कराई थी लेकिन तहसील महराजगंज क्षेत्र के बावन बुजुर्ग बल्ला जैसी दर्जनो ग्राम सभाओं मे चारागाह की भूमि को भू माफियाओं द्वारा दोबारा कब्जा कर प्रदेश सरकार के आदेशों को चुनौती देने का काम किया है़।
प्रदेश सरकार के आदेशानुसार वर्षो से  कब्जाई गई सुरक्षित चरागाह भूमि से एंटी भूमाफिया टीम ने प्रत्येक ग्राम सभाओ में भूमाफियाओं के चंगुल से लगभग सैकडो बीघा चरागाह की जमीन की पैमाइश कर खड़ी गेहूं की फसल को ट्रैक्टर से जुतवा कर मुक्त करवाया था।  जिससे आवारा मवेशियों को काफी राहत मिली थी लेकिन छः माह भी नही बीता कि दबंगों ने तहसील में बैठे घूसखोर कर्मचारियो से अपनी सेटिंग कर फिर से चारागाह की जमीन पर गेहू फिर धान फिर गेहू कि बोआने का काम किया है़। जिसको लेकर फिर से आवारा पशुओं को चरने के लिए भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है।
बताते चले कि प्रदेश में भजपा की सरकार बनते ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी  घोषणा में कहा था कि, ग्राम सभा की चरागाह, खलिहान, खाद के गड्ढ़े, तलाब आदि की सुरक्षित जमीन पर कब्जा करने वालों को तत्काल प्रभाव से सरकारी जमीन खाली कराई जाय। जिसको लेकर सरकार ने प्रत्येक तहसीलों में एंटी भूमाफिया टीम का का गठन किया। टीम ने अभियान चलाकर प्रत्येक ग्राम सभाओ में सुरक्षित जमीनो को लगभग दबंगों के चंगुल से मुक्त करवाने में कड़ी मशक्कत की और लगभग सुरक्षित जमीन खाली भी करवा ली। लेकिन भू माफियाओं ने हौसला बुलंद करते हुए चारागाह की जमीन पर दोबारा कब्जा कर सरकार और प्रशासन को चुनौती देते हुऐ, खाली कराई गई सुरक्षित जमीन पर अपना कब्जा जमाते हुए धान की रोपाई के बाद अब गेहूं भी वो लिया है़। आज आलम यह है कि सुरक्षित चारागाह की जमीन पर गेहूं की लहराती फसल खड़ी हुई है। आवारा गाए बछड़े किसानो की फसल चरने को मजबूर है औऱ किसान अपनी फसल चरने को लेकर जगह जगह धरना प्रदर्शन कर रहे है प्रशासन भी प्रदर्शन करियो को फसल नुकसान न होने का आश्वासन तो दे रहे है लेकिन इन जानवरो की चारागाह की जमीन खाली करवाने की कोई बात नही कर रहा है। आखिर सोचने का विषय है। कहाँ से आए ये गाए औऱ बछड़े इनका मालिक आखिर है तो किसान ही फिर भी धरना। दूध खा लिए औऱ इनकी जमीन भी कब्जा कर ली औऱ छोड दिए फिर जिम्मेदार कौन है।
        मामला बावन बुजुर्ग बल्ला गाँव का है, बीते दो वर्ष पूर्व मे एंटी भूमाफिया टीम ने चरागाह की गाटा  संख्या  5124, 5232, 5305, 5308, 5524 जो कि, करीब पचासों बीघा जमीन तहसील प्रशासन ने भू माफियाओं से खाली करा कर मुक्त कराई थी लेकिन लगभग सारी जमीन पर दबंगों ने फिर से अपना अपना कब्जा कर गेहूं की बोआई करा डाली। लेकिन तहसील में बैठे जिम्मेदार अधिकारियों के कानो में जूं तक नही रेंगी। इतना ही नही कुछ भूमाफियाओं ने तो सुरक्षित  चरागाह की जमीन में अपने नाम आवंटन भी करा लिया है। जब कि सुरक्षित जमीन का आवंटन नही होता है़। लोगो की मानें तो चारागाह की सुरक्षित जमीन पर भू माफियाओं द्वारा दोबारा कब्जा किए जाने में तहसील प्रशासन के अधिकारी व कर्मचारी भी लिप्त है, जो इन भू माफियाओं से कमाई गई मोटी रकम से अपनी तिजोरियां भरने का काम करते रहे हैं।साथ ही सुरक्षित चरागाह की भूमि पर कराए गये आवंटन पर पैमाइश करने गई टीम ने बताया कि, जल्द ही कार्यवाही कर गलत तरीके से कराए गये पट्टे को निरस्त कराया जएगा। लेकिन तहसील प्रशासन व एंटी भूमाफिया टीम द्वारा दो वर्ष बीत जाने के बाद भी अब तक कोई भी कार्यवाही नहीं की गई। जिसको लेकर ग्रामीणों में रोष व्याप्त है।

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