किसान ने स्ट्रॉबेरी की खेती कर पेश की मिसाल

Raebareli Uttar Pradesh

प्रमोद राही

मोहनलालगंज,लखनऊ।मोहनलालगंज के रहने वाले एक किसान नें स्ट्रॉबेरी की खेती कर पेश की मिसाल अगर इंसान अपने दिल में कुछ करने की ठान ले तो क्या कुछ नहीं कर सकता यह कहावत लखनऊ के सिद्धार्थ सिंह पर लागू होती है जिन्होंने विदेश की नौकरी ठुकरा कर एक नई सोच नए जोश व जज्बे के साथ स्ट्रॉबेरी की खेती करके नए अध्याय की शुरुआत कर दी है |
मोहनलालगंज तहसील के गोपाल खेड़ा गांव निवासी राजेश सिंह और उनके रिश्तेदार सिद्धार्थ सिंह ने मिलकर गांव में स्ट्रॉबेरी की फसल उगा करके खेती की एक नई दिशा व दशा तय कर दी।
बातचीत करने के दौरान उन्होंने बताया कि विदेश में एमबीए की पढ़ाई पूरी होने के बाद एक कंपनी ने अच्छे पैकेज के साथ ऑफर दिया और नौकरी कर ली ,कुछ साल बीत जाने के बाद स्ट्रॉबेरी के विषय में जानकारी हुई अच्छी खासी जानकारी प्राप्त करने के बाद विदेश की नौकरी छोड़कर वापस गांव आ गए और रिश्तेदार राजेश सिंह के साथ मिलकर स्ट्रॉबेरी की खेती करने का प्लान तैयार हुआ यह निर्णय इतना आसान नहीं था लेकिन इंसान कुछ करने की ठान ले तो क्या कुछ नहीं कर सकता इसी सोच के साथ स्ट्रॉबेरी की खेती करने की प्लानिंग तैयार की इससे पहले हिमाचल प्रदेश मध्य प्रदेश जाकर खेती की कुछ बारीकियां समझी उसके बाद मोहनलालगंज के गोपाल खेड़ा गांव मे राजेश सिंह के साथ मिलकर सितंबर माह में 1 एकड़ भूमि पर लगभग 25 हजार स्ट्रॉबेरी का पौधरोपण किया गया

स्ट्रॉबेरी की ऐसी की जाती है शुरुआत

किसान राजेश सिंह ने बताया ड्रिप सिंचाई पाली टनल के सहारे फसल उगाई फसल सुरक्षित रखने के लिए पाली टनल का सहारा लिया पौधों को बूंद बूंद पानी देने के लिए ड्रिप सिंचाई की व्यवस्था की स्ट्रॉबेरी पौधरोपण के समय फसल के लिए उपयोगी तापमान लाने पाला से बचाने के लिए सफेद या काली पॉलीथिन लगाई जाती है पौधा लगाने के लगभग 60 दिनों बाद फल आ जाता है जो लगभग 40 से 45 दिन में पक जाता है अत्यधिक ठंड के मौसम में फल पकने में समय लग जाता है यह फल अपने विशिष्ट सुगंध चमकीले लाल रंग रसदार बनावट और मिठास के लिए दुनिया भर में मशहूर है यह बड़ी मात्रा में सेवन किया जाता है । इस फल को व्यापक रूप से कई औद्योगिक उत्पादों में भी इस्तेमाल किया जाता है। किसान सिद्धार्थ सिंह बताते हैं कि स्ट्रॉबेरी खेती करना चुनौतीपूर्ण लग रहा था लेकिन अनुभव और तकनीक के सहारे फसल तैयार हो गई। दिसंबर से लेकर फरवरी तक लगभग 30 से 40 कुंतल स्ट्रॉबेरी का उत्पादन किया है मार्च के अंत तक उम्मीद से ज्यादा स्ट्रॉबेरी उगने का अनुमान है।

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