गायत्री मंत्रों से गूँजा लमुई गॉव

Raebareli Uttar Pradesh

हीरे जैसा यह नर तन मिला है ,जो गंवाने के काबिल नहीं है यह हर श्वास अनमोल मोती ,जो यह लुटाने के काबिल नहीं है….

मनुष्य के जीवन में सबसे मूल्यवान ज्ञान है

दिलीप मिश्रा

सलोन,रायबरेली।गायत्री चेतना केंद्र लमुई में गायत्री मंत्रोच्चारण के साथ 51 वेदीय यज्ञ की शुरूआत हुई।जिसमें पाँच सौ लोगों ने आहुतिया देकर ,विश्व शान्ति और लोगों के कल्याण के लिए माँ गायत्री से कामना की।
स्वस्थ शरीर, स्वच्छ मन एवं सभ्य समाज का अभिनव निर्माण ,मानव में देवत्व का उदय ,धरती पर स्वर्ग के अवतरण एवं युग परिवर्तन का शिव संकल्प लिए गुरुवार को गायत्री चेतना केन्द्र लमुई सलोन में आयोजित 51कुंडीय गायत्री महायज्ञ एवं महाकाल प्राण प्रतिष्ठा समारोह के दूसरे दिन यज्ञशाला में हवन कुंडों में हवन कर यज्ञ की शुरुआत माँ गायत्री के मंत्रो से हुई ।

इस यज्ञ में महिलाओं और पुरुष और बच्चे सम्लित हुए।इस दौरान गायत्री माता के उद्घोष से पूरा माहौल भक्तिमय बना रहा। शांतिकुंज हरिद्वार से आए टोली नायक नमो नारायण पांडे की टोली की देखरेख में विधि विधान से यज्ञ हुआ इस मौके पर नमो नारायण पांडे ने कहा कि यज्ञ की भौतिक और आध्यात्मिक महत्ता असाधारण हैं ।भौतिक या आध्यात्मिक जिस क्षेत्र पर भी दृष्टि डालें उसी में यज्ञ की महत्वपूर्ण उपयोगिता दृष्टिगोचर होती है वेद में ज्ञान ,कर्म ,उपासना तीन विषय हैं कर्म का अभिप्राय कर्मकांड से है कर्मकांड यज्ञ को कहते हैं वेदों का लगभग एक तिहाई मंत्र भाग यज्ञ से संबंध रखता है। यूं तो सभी वेद मंत्र ऐसे हैं जिनकी शक्ति को प्रस्फुरित करने के लिए उनका उच्चारण करते हुए यज्ञ करने की आवश्यकता होती है ।लेकिन गायत्री मंत्र को महामंत्र कहा गया है इस मंत्र से यज्ञ करने की महत्ता विशेष है। यज्ञ के पश्चात भक्तों ने यज्ञशाला की परिक्रमा भी की इसके शाम को प्रज्ञा पुराण कथा नमो नारायण पांडे जी द्वारा सुनाई गई कथा का संगीतमय वाचन करते हुए पांडे ने कहा कि हीरे जैसा यह नर तन मिला है ,जो गंवाने के काबिल नहीं है
है यह हर श्वास अनमोल मोती ,जो यह लुटाने के काबिल नहीं है।

ज्ञान के महत्व को बताते हुए कहा कि मनुष्य के जीवन में सबसे मूल्यवान ज्ञान है विद्या है संपत्ति सांसारिक सुख तो देगा लेकिन मानसिक शारीरिक और आध्यात्मिक सुख ज्ञान ही देता है इसी ज्ञान और संस्कारों की अविरल धारा से नवपीढ़ी क्या अभिषेक कराने से ही उसका मनुष्य जीवन सफल होगा किसी भी परिवार की दौलत उसकी संस्कारित युवा पीढ़ी होती है आज हो यह रहा है कि भावी पीढ़ी के लिए तिजोरी में धन दौलत एकत्र किए जा रहे हैं इसे संस्कारों की तिजोरी खाली रह रही है युवा पीढ़ी को समृद्ध बनाना है तो उनके जीवन में संस्कार रूपी पूंजी जमा करें । इस मौके पर गायत्री चेतना केंद्र के मुख्य ट्रस्टी संगम लाल शुक्ल ,ट्रस्टी त्रिवेणी प्रसाद शुक्ल ,प्रभाकर शुक्ला ,दिवाकर शुक्ला ,सुधाकर शुक्ला ,गायत्री शक्तिपीठ रायबरेली के जिला समन्वयक वी बी सिंह ,रामेश्वर यादव समेत सैकड़ों की संख्या में महिलाएं व पुरुष उपस्थित रहे।

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