अगर माटी के पुतले देह में ईमान जिंदा है, तभी इस देश की समृद्धि का अरमान जिंदा है

Raebareli Uttar Pradesh

साधु-संतों की उपस्थिति में कवियों ने बांधा समां

बछरावां,रायबरेली।कभी हास्य के फुहारों में गोता लगाते श्रोता तो कभी वीर रस की कविता पर फडक़ती भुजा और इनके सबके बीच खुले मैदान में गूंजती तालियों की गडगड़़ाहट। महान स्वतंत्रता संग्राम सेनानी मुंशी चंद्रिका प्रसाद गुरु जी की तपोस्थली कंजेश्वर धाम मंदिर के मैदान में बसंत महोत्सव के समापन अवसर पर आयोजित कवि सम्मेलन में देश के विभिन्न प्रांतों से आए साधु-संतों की उपस्थिति के बीच कुछ ऐसा ही नजारा दिखायी दिया। कवि सम्मेलन की शुरुआत वीर रस की कवियत्री सरिता यादव ने मां शारदे की आराधना से की। सरिता ने अगर माटी के पुतले देह में ईमान जिंदा है, तभी इस देश की समृद्धि का अरमान जिंदा है सुनाई। ओज व व्यंग्य रस के कवि लोकतंत्र शुक्ला ने कहा कि क्षेत्रवासियों कि यह काशी श्री कंजेश्वर धाम है, इस माटी के कण-कण को मेरा सौ सौ बार प्रणाम है।

हास्य के कवि डॉ शुकदेव छैल ने कहा कि बाज ने चुनाव में बड़ा काम किया है। नीरज पांडे ने कहा अक्षय व सलमान वाली पीढ़ी के जवानों, राम कृष्ण व विवेकानंद को ना भूलना। ओज के कवि मासूम ने कहा लीबिया की क्रांति का आगाज कर डाला तुमने। श्रंगार के कवि निर्मल श्रीवास्तव ने गया गीत गजल गाकर प्यार बांटता हूं। हास्य के कवि उत्तम सोनी ने कहा कहो विधायक कैसे आयो । कवि रामाश्रय सिंधु ने कहा देश की माटी हमारे भाल का चंदन है। वीर रस के कवि उत्कर्ष उत्तम ने कहा यह नई सदी का भारत है इसकी अपनी ही भाषा है। कार्यक्रम का संचालन सतांव के श्रृंगार कवि नीरज पांडे ने किया।पस्तौर गांव के कृष्ण पाल यादव ने युवाओं को संदेश दिया कि मेहनत व संघर्ष करने से मंजिल जरूर मिलती है। इससे पहले अजय सिंह दउवा, आलोक कुमार, नितिन मोहन, बृजेश वर्मा, राकेश तिवारी, गोकरन प्रसाद आदि ने कवियों का स्वागत किया। कवि सम्मेलन में राजगुरु संपूर्णानंद ब्रह्मचारी जी महाराज, भारत साधु समाज के अध्यक्ष स्वामी मुक्तानंद जी महाराज, परमेश्वरानंद जी महाराज, गोविंद जी महाराज सहित बड़ी संख्या में साधु-संत व आसपास के गांवों से सैकड़ों की संख्या में महिला पुरुष व बच्चे मौजूद रहे।

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