बड़े बाबा का ऐतिहासिक मेला एवं विशाल भंडारा सम्पन्न

Raebareli Uttar Pradesh

अंगद राही

रायबरेली।शिवगढ़ क्षेत्र के जयचन्दपुर मजरे बैंती में भवानीगढ़- सूरजपुर संपर्क मार्ग पर स्थित बड़े बाबा के प्राचीन कालीन मंदिर में गत वर्षो की भांति बसन्त पंचमी के पावन अवसर पर दो दिवसीय ऐतिहासिक मेले एवं विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। मेले में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ देखते नहीं बन रही थी। आलम यह था कि भारी भीड़ के चलते मेले में इस पार से उस पार गुजरना मुश्किल हो रहा था। वहीं भण्डारे में पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद छककर मनोकामनाएं मांगी। विदित हो कि बड़े बाबा का प्राचीन कालीन मंदिर सैकड़ों वर्ष पुराना है।

जहां करीब 300 वर्षों से प्रतिवर्ष बसंत पंचमी के पावन अवसर पर बड़े बाबा का दो दिवसीय मेला लगता चला रहा है। मेले के दूसरे दिन मेला कमेटी द्वारा विशाल भंडारे का आयोजन किया जाता है जिसमें क्षेत्र ही नहीं दूरदराज से आने वाले हजारों श्रद्धालु प्रसाद छककर मनोकामनाएं मानते हैं।

मान्यता है कि बड़े बाबा की शक्ति पर आस्था रखने वाले श्रद्धालुओं की हर मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। यही कारण है कि जिले के साथ-साथ गैर जनपदों से आकर श्रद्धालु बाबा के मंदिर में माथा टेककर मनोकामनाएं मांगते हैं। मान्यता है कि बाबा की शक्ति पर आस्था रखने वाले श्रद्धालु भले ही खाली हाथ आते हो किंतु खाली हाथ कभी वापस नहीं जाते। इस अवसर पर मेला कमेटी के बाबा जागेश्वर, भवानीदीन, मैकू लाल, गंगा प्रसाद रावत, जमुना प्रसाद,पप्पू, श्रवण कुमार, राम जी प्रजापति, मनोज कुमार, रामखेलावन, हुबलाल, प्रदीप कुमार, गुरुदीन सहित हजारों की संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे।

त्रिकूट धाम बन गया बाबा का आश्रम

बताते चलें कि पहले बाबा का इकलौता मन्दिर था किंतु बाबा की बढ़ती आस्था और विश्वास के चलते मंदिर प्रांगण में श्रद्धालुओं ने संकट मोचन मंदिर एवं शिव मंदिर का निर्माण करा दिया गया है। जिसके चलते अब बड़े बाबा का आश्रम त्रिकूट धाम बन गया है। जहां सप्ताह के सातों दिन श्रद्धालुओं का ताता लगता है। बसंत पंचमी के दिन तो दर्जनों श्रद्धालु दूरदराज से परिक्रमा करते हुए बाबा के दर्शन के लिए आते हैं। बाबा का आश्रम लोगों की आस्था विश्वास का जीता जागता प्रमाण बन गया है।

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