चुप क्यों है यह सियासत का जमाना

Raebareli Uttar Pradesh

मुशायरा एवं कवि सम्मेलन में कवियों ने बांधा समां

दिलीप मिश्रा

सलोन-रायबरेली।जिसको अतहर ने सोचा है हर एक पल,ऐसे गुलशन को कहते हैं हम एसीएल।
बुधवार को दोपहर एसीएल इंस्टिट्यूट सलोन द्वारा आयोजित मुशायरा एवं कवि सम्मेलन समारोह में मां सरस्वती के पुत्रों ने अपने कलम से राजनेताओं से लेकर पाक की नापाक करतूतों की अपनी रचनाओं से उजागर कर श्रोताओं की तालियां बटोरी। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि के रूप मे उपस्थित अल्फा कान्वेंट स्कूल सलोन के प्रधानाचार्य शोएब खान द्वारा किया गया।

शायर कासिम हुनर सलोनी ने,हमसे नफरत की कोई बात न की जाएगी हम तो तबलीग-ए-मोहब्बत के लिए जिंदा है,पढ़ा कवि सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ कवि प्रतापगढ़ ने हजार जुल्म भी सहकर अनीश चुप क्यों है यह सियासत का जमाना है गुजर जाने दो,वही कवि अनूप प्रतापगढ़ी ने,वह और पहले संभल जाता तो अच्छा था,इरादा उसका बदल जाता तो अच्छा था पढ़ा। कवि बृजेश वर्मा ने,हिंदू का है मुस्लिम का है मां मिलकर होता हम,हम में इतनी ताकत है कि नहीं किसी से कम,आदि पंक्तियों को पढ़कर के मौजूद लोगों का मन मोह लिया।

वह बृजेश श्रीवास्तव तन्हा,आदमी हो मगर आदमी यत रहे साफ दिल के बनो नेक नियत रहे,काम तन्हा जहां में कुछ ऐसा करो जिंदगी बंदगी की वसीयत रहे,इन पंक्तियों को सुनकर के बैठे हुए श्रोता बिल्कुल भाव विभोर हो गए।कार्यक्रम के आयोजक मोहम्मद अतहर एशियन इंस्टिट्यूट के प्रबंधक ने कहा कि कविता बच्चों की प्रेरणा का स्रोत होता है। कविता जीवन में आगे बढ़ने का रास्ता दिखाती है। कार्यक्रम के अंत में संचालक मोहम्मद स्वयं संचालक अल्फा कान्वेंट स्कूल ने लोगों का बहुत आभार व्यक्त किया।

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