खरहरा कुटी के बाल ब्रह्मचारी महन्त रामखेलावन दास जी महराज का निधन

Raebareli Uttar Pradesh

● महराज जी के आकस्मिक निधन से शोक में डूबे शिष्य

रायबरेली। शिवगढ़ क्षेत्र के ग्राम पंचायत सीवन में खरहरा गांव की पावन तपोभूमि में स्थित खरहरा कुटी के बाल ब्रह्मचारी महन्त रामखेलावन दास जी महराज की बृहस्पतिवार को हृदय गति रुकने से 65 वर्ष की आयु में उनका आकस्मिक निधन हो गया। जिनके निधन की खबर से उनके भक्तों में शोक की लहर दौड़ गई है। विदित हो कि रामखेलावन दास जी महराज को पहली बार 3 वर्ष पूर्व दिल का दौरा पड़ा, जिसके बाद बृहस्पतिवार की रात करीब 10 बजे उन्हे दूसरी बार दिल का दौरा पड़ने पर उनके भक्त उन्हे लखनऊ स्थित लॉरी हॉस्पिटल ले गए थे जहां इलाज के दौरान रात करीब 12 बजे उनका आकस्मिक निधन हो गया। महन्त रामखेलावन दास जी महराज जी के यूपी भर में हजारों अनन्य भक्त है।

यूपी के साथ ही अन्य प्रांतों से भी भक्तगण महराज जी के दर्शन के लिए आते थे। जिनके निधन की खबर से उनके भक्तों में शोक की लहर दौड़ गई है। सीवन निवासी चंद्रेश सिंह उर्फ कल्लू सिंह व अन्य भक्त गण बताते हैं कि महंत रामखेलावन दास जी महराज के गुरु भीषम दास जी महराज भी बाल ब्रह्मचारी थे जिन्होंने कुटी के स्थान पर कई वर्षों तक तप करने के बाद कुटी प्रांगण में सन् 1952 में राम जानकी मंदिर की नीव डाली थी। बताते हैं कि कुटी में जो भक्त सच्चे मन से कुटी में आते थे उनकी मनोकामना अवश्य पूरी होती थी। यही कारण है कि कुटी में यूपी के कोने-कोने से श्रद्धालु आते थे। बताते हैं कि रामखेलावन दास जी महराज दो भाई थे, जो शिवगढ़ क्षेत्र के बैंती गांव के रहने वाले थे। बचपन में ही उनके पिता का निधन हो जाने के कारण उनकी मां पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा था। पति के निधन के बाद अस्वस्थ हुए बेटों को लेकर उनकी मां खरहरा कुटी पहुंची और उन्होंने दोनों बेटों को भीषम दास जी महराज के चरणों में लिटा दिया। जिनकी कृपा से कुछ ही देर में दोनों बेटे बिल्कुल स्वस्थ्य हो गए और उसी समय 5 वर्षीय रामखेलावन दास जी महराज ने बाल ब्रह्मचारी बनकर भीषम दास जी महराज की सेवा करने का दृढ़ निश्चय कर लिया। जिनकी श्रद्धा भक्ति और त्याग के परिणाम स्वरूप भीषम दास जी महराज ने सन 1964 में ही गद्दी धर के लिए उनका तिलक कर दिया था। किंतु गुरु के रहते हुए उन्होंने गद्दी पर बैठना मुनासिब नही समझा। सन 1975 में कुटी के संस्थापक एवं गुरु भीषम दास जी के निधन के पश्चात महन्त राम खेलावन दास जी महराज खरहरा कुटी के गद्दीधर बने। सन 1952 से कुटी में हर वर्ष जेष्ठ मास की पूर्णिमा को अनवरत रूप से भण्डारे का आयोजन होने के साथ ही प्रत्येक मंगलवार को भक्तगण कुटी में दर्शन के लिए आते रहते हैं।

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