स्कूटर्स इंडिया लिमिटेड के कर्मचारियों ने अपने परिजनों संघ न्यायाधीश ,राष्ट्रपति , प्रधान मंत्री व भारी उद्योग मंत्री से मांगी इच्छामृत्यु

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मुकेश कुमार
कम्पनी के 61 कर्मचारियों ने प्रबंध निदेशक के माध्यम से भेजा हस्ताक्षर युक्त मांग पत्र
कर्मचारियों की अभी बाकी है छब्बीस वर्ष तक की नौकरी
जबरन दबाव डाल कर दिया जा रहा है वी आर एस
सरोजनीनगर-लखनऊ सरोजनीनगर स्थित भारत सरकार द्वारा संचालित स्कूटर्स इंडिया लिमिटेड भारत सरकार की इकलौती ऑटोमोबाइल कंपनी है ।जो मोदी जी की इलेक्ट्रिक व्हीकल के सपनों को पूर्ण करती है ।जिसे स्कूटर्स इंडिया में प्रबंध निदेशक श्री निवास लू व उद्योग मंत्रालय निदेशक ए के सिंह के साथ मिलकर कम्पनी को बंद करने जा शड़ यंत्र करते आ रहे है ।कम्पनी को जानबूझ कर घाटे में दिखाकर बंद करा दिया है ।यहां पर तैनात कर्मचारियों का जबरन वी आर एस दिया जा रहा है ।कम्पनी में अब मतदय 61 कर्मचारी ही तैनात है ।जिन्हे कम्पनी प्रशासन द्वारा जबरन वी आर एस दिया हा रहा है ।जबकि अभी कर्मचारियों की नौकरी दस वर्ष से लेकर छब्बीस वर्ष तक की अभी शेष बाकी है ।भारत सरकार द्वारा स्कूटर्स इंडिया लिमिटेड भारत सरकार का उपक्रम है ।जिसे बंद करने का निर्णय लिया गया है ।कर्मचारी कम्पनी बंद होने से बेरोजगार हो गए है और उनका परिवार अब बिल्कुल सड़क पर आ चुका है ।इससे परेशान होकर कम्पनी के 61कर्मचारियों ने मंगलवार को एक साथ भारत के मुख्य न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट ,राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ,प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदर दास मोदी के साथ ही भारी उद्योग मंत्री को कम्पनी के प्रबंधन के माध्यम से पत्र भेज कर कमचारियों ने अपने परिजनों संघ इच्छामृत्यु की मांग की है।कम्पनी कर्मचारियों का आरोप है कि कम्पनी के प्रबंध निदेशक पिछले एक साल से कम्पनी नहीं आ रहे है और घर पर ही बैठ कर उल्टे सीधे आदेश दे रहे है साथ ही सरकारी पैसों का दुरुपयोग कर रहे है ।न कर्मचारियों को सैलरी दे रहे है और न ही उनके हित में भी कोई निर्णय ही लेे रहे है ।बल्कि कर्मचारियों के उपर सीधे दबाव डाल रहे है ।जिससे कर्मचारियों की मानसिक स्थिति सामान्य ही गई है ।जबकि कम्पनी के पास पर्याप्त धन है ।जिससे अगले दो वर्षों तक कर्मचारियों को वेतन दिया जा सकता है । कर्मचारियों का आरोप है कि जब से यह नए कम्पनी के प्रबंध निदेशक बनाए गए है।तब से कम्पनी लगातार घाटे में जा रही है ।यहां के डीलरो व वेंडरों से पैसा लेकर पूरी कम्पनी को भ्रष्टाचार लिप्त कर दिया है ।कर्मचारियों का कहना है कि प्रबंध निदेशक व उद्योग मंत्रालय के निदेशक एस के सिंह के गलत रवैए के तहत ही कम्पनी में कार्यरत सैकड़ों युवा लड़की को बिना वेतन दिए ही कोरोना काल में ही निकाल दिया गया था ।जिन युवाओं को कहीं भी अब तक नौकरी नहीं मिल सकी है और कहीं नौकरी में भी नहीं है ।जिससे उनकी जिंदगी बदहाली से भी बदतर चल रही है ।बावजूद इसके ही कम्पनी में संविदा के तौर पर 325 युवा कर्मचारी काम कर रहे थे ।जिन्हे कोरॉना काल के लॉकडाउन के बाद ही निकाल दिया गया था ।कम्पनी के कर्मचारियों जा कहना है कि सरकार का दायित्व न सिर्फ देश को आगे बढ़ाना है बल्कि युवाओं का भविष्य सवा रना व रोजगार देना है न कि उन्हें बेरोजगार कर उनके व उनके परिवारों के लोगो को सड़को पर फेंक देना है । कम्पनी में धन के अभाव में व और कोई रास्ता दिखाई न देते हुए कम्पनी के सभी युवा कर्मचारी अपने परिवार संघ इच्छामृत्यु स्वीकार करने की भारत के मुख्य न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट ,राष्ट्रपति भारत रामनाथ कोविंद ,प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के साथ ही भारी उद्योग मंत्री ,उद्योग मंत्रालय को एक हस्ताक्षर युक्त मांग पत्र कम्पनी के प्रबंध निदेशक में माध्यम से भेजा है । ताकि सभी बेरोजगार कर्मचारी अपने परिजनों संघ इच्छा मृत्यु प्राप्त कर सके । जिससे न भारत सरकार केसुप्रिम कोर्ट के न्यायाधीश ,राष्ट्रपति ,प्रधान मंत्री व उद्योग मंत्री आराम से अपना जीवन गुजर बसर करे ।उन्हें और किसी से कुछ लेना देना नहीं रहेगा । देश के लोग कहीं जाए और कुछ भी करे उनसे कुछ मतलब नहीं है ।इस कार्यक्रम का नेतृत्व वाइस प्रेसिडेंट एन के मिश्रा ,जनरल सेक्रेटरी नवनीत शुक्ला ,ज्वाइंट सेक्रेटरी अमित कुमार ,ट्रेजरार शक्ति प्रदर्शन ने कम्पनी के कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करते हुए उनकी समस्याओं को बताया और उनकी मांगों को भी रखा ।इस मौके पर कर्मचारियों में डिप्टी मैनेजर पल्लवी गुप्ता ,डिप्टी मैनेजर मोनिका राय के साथ ही शिव सागर ,रितेश अरोड़ा ,ए के चटर्जी , आर के रोशन ,अजय सिंह ,सहित तमाम कर्मचारी उपस्थित थे ।

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