विभिन्न संगठनों के तत्वाधान में मनाया गया जन्म दिवस

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धीरज शुक्ला

रायबरेली

जनपद के विभिन्न संगठनों द्वारा महाराजा सुहेलदेव पासी का जन्म दिवस स्थानीय अमर शहीद चन्द्रशेखर आजाद पार्क में बड़े ही श्रद्धापूर्ण वातावरण में मनाया गया, कार्यक्रम का आयोजन राष्ट्रीय पासी सेना ने किया। सभी पदाधिकारियों ने राजा सुहेलदेव पासी के चित्र पर माल्र्यापण एवं पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धाँजलि अर्पित की। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उ0प्र0 उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मण्डल के प्रान्तीय संगठन मन्त्री मुकेश रस्तोगी उपस्थित रहे। कार्यक्रम को सम्बोधित करते हुए मुख्य अतिथि श्री रस्तोगी ने कहा कि महमूद गजनवी का सेनापति एवं उसका भांजा सैय्यद सालार मसूद सोलह वर्ष की आयु में सिंध, मुल्तान, दिल्ली, मेरठ, कन्नौज, फतेहपुर सीकरी पर विजय प्राप्त करते हुए आगे बढ़ रहा था। बाराबंकी के सतरिख में केन्द्र बनाकर बहराइच, श्रावस्ती सहित अयोध्या के आस-पास के लगभग 21 राजाओं से युद्ध किया और सभी को हराया, इसके बाद सारे राजाओं ने मिलकर संगठन बनाकर युद्ध लड़ा, फिर भी पराजय हाथ लगी, अंततः तमाम राजाओं ने संयुक्त रूप से श्रावस्ती सम्राट महाराजा सुहेलदेव से सेनाओं का नेतृत्व करने का प्रस्ताव रखा। ज्येष्ठ मास के पहले रविवार 10 जून 1034 को युद्ध में सुहेलदेव ने मसूद गाजी को मारकर सनातन संस्कृति की रक्षा की। राष्ट्रीय पासी सेना के अध्यक्ष संजय पासी ने कहा कि ग्यारहवीं शताब्दी के अनिश्चिततापूर्ण वातावरण में राष्ट्र नायक के रूप में सनातन संस्कृति के ध्वजवाहक महाराजा सुहेलदेव पासी का उदय हुआ। श्री पासी ने कहा कि सैय्यद सलार गाजी महाराजा सुहेलदेव पासी से हुए युद्ध में तीन लाख सेना लेकर आया था, महाराजा ने सैय्यद सलार गाजी सहित उनकी पूरी सेना को मारदिया, मात्र दो सैनिक जीवित छोड़े और उनसे कहा कि अपने देश में जाकर बताओ की भारत देश में वीरों की कमी नहीं है। महाराजा सुहेलदेव पासी के कारण ही लगभग तीन सौ वर्षो तक विदेशी आक्रान्ताओं ने भारत की तरफ आँख उठाकर नहीं देखा। स्वर्णकार विचार मंच के लखनऊ मण्डल संयोजक भौमेश कुमार सोनी ने कहा कि महाराजा सुहेलदेव का जन्म बहराइच में बसंत पंचमी के दिन 990 में हुआ था, इनका शासनकाल 1027 से 1077ई0 तक माना जाता है। ए.बी.डी.एम. के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष कमलेश चैधरी ने कहा कि उनके जन्मोत्सव पर संकल्प लेना चाहिए कि समाज को उनके जीवन दर्शन को पढ़-समझकर एकता, अखंडता, राष्ट्रधर्म के प्रति निष्ठावान रहते हुए राष्ट्र की संस्कृति, उसकी परम्पराओं की रक्षा के प्रति सदैव तत्पर रहें। कार्यक्रम में मुख्य रूप से वरिष्ठ अधिवक्ता डा0 मिथिलेश ओझा, अशोक मिश्रा, सपा नेता सुशील मौर्या, मो0 शाकिब कुरैशी, शत्रुघ्न पटेल, हनुमान प्रसाद वर्मा, विक्रम पटेल, सी.बी. गौतम, राम भरोसे, देशराज पासी, दिनेश सिंह नरौका, वीरेन्द्र कुमार, धीरज पासी, चन्द्रप्रकाश, अभिषेक पासी, मो0 अयाज खाँ, मो0 नईम, फूलचन्द्र लोधी, रामशरण लोधी, मो0 इसरार खाँ, गनेश पासी, रंजीत पासी, हरिशरण श्रीवास्तव, संदीप पासी, राममिलन यादव, महेन्द्र गौतम, हरिकेश यादव, रानू भारती, संकठा प्रसाद बाजपेयी, सर्वेश गुप्ता, राजेश सोनी, बच्चू लाल अग्रहरि, हिमांशु पासी, राजू अवस्थी, तेज बहादुर यादव, रोहित सिंह, दिनेश पासी, अनूप बाजपेयी, अनुराग पासी, पंकज त्रिपाठी आदि लोग उपस्थित रहे।

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