अमवा मुर्तजापुर में युवा दिवस के रूप में मनाया गया स्वामी विवेकानंद का जन्म दिन

National Uttar Pradesh जागरूकता

गीत संगीत के माध्यम से ग्रामीणों को किया गया जागरूक

प्रमोद राही

नगराम लखनऊ।नगराम क्षेत्र के अमवा मुर्तजापुर गांव के प्राथमिक विद्यालय में एकल अभियान की तरफ से स्वामी विवेकानंद का जन्म दिवस युवा दिवस के रूप में मनाया गया। रविवार को अमवा मुर्तजापुर के प्राथमिक विद्यालय में एकल विद्यालय के शिक्षक व शिक्षिकाओं द्वारा स्वामी विवेकानंद का जन्मदिवस एकल सप्ताह के रूप में मनाया गया कार्यक्रम में असलम नगर खवास खेड़ा के स्कूली बच्चों द्वारा संगीत नाच गाना व एकांकी प्रस्तुत कर स्वामी विवेकानंद के विचारों को प्रस्तुत किया गया। अंचल प्रशिक्षण प्रमुख सुशील कुमार ने बताया 10 जनवरी 2021 को स्वामी विवेकानंद का जन्म दिवस एकल सप्ताह के रूप में मनाया जा रहा है। इस कार्यक्रम में प्रशिक्षण प्रमुख सुशील कुमार संघ प्रमुख नगराम संजय कुमार अरविंद पाल गढ़ा ग्राम समिति के बन्धु मोतीलाल प्रधान ग्राम प्रमुख बुद्धिराम शिवकुमार मिथिलेश कुमारी मंसाराम चौकीदार अरविंद कुमार ग्रामीण सहित दर्जनों एकल अभियान के कार्यकर्ता मौजूद रहे। इस दौरान अरविंद पाल ने अपने शब्दों में ग्रामीणों को जागरूक करते हुए बताया स्वामी विवेकानंद युवाओं के प्रेरणा स्त्रोत थे उन्होंने बताया स्वामी विवेकानंद का जन्मदिवस युवा दिवस के रूप में काफी धूमधाम से मनाया जाता है हर वर्ष यह दिन 12 जनवरी को मनाए जाने का विधान है क्योंकि 1863 में इसी दिन कोलकाता के एक साधारण परिवार में स्वामी विवेकानंद का जन्म हुआ था बाद में अध्यात्म के क्षेत्र में उनके द्वारा किए गए कार्यों को देख देश-विदेश के युवाओं का ध्यान अध्ययन की ओर आकर्षित हुआ बचपन से ही विवेकानंद जी को संगीत साहित्य तैराकी घुड़सवारी और कुश्ती में रुचि थी। स्वामी विवेकानंद ने अपने तेजस्वी वाणी और अपने प्रभाव से विदेशों में भारतीय संस्कृत और अध्यात्म का डंका बजाया था। उनके द्वारा सदैव वैज्ञानिक सोच तथा तर्क पर बल दिया गया। जब स्वामी विवेकानंद 20 वर्ष के थे तभी उनके पिता विश्वनाथ दत्त की मृत्यु हो गई थी ऐसे में पिता की मृत्यु के बाद स्वामी विवेकानंद को भी अत्यंत गरीबी की मार का सामना करना पड़ा था लेकिन गरीबी और भुखमरी भी उनका मनोबल और ईमान नहीं डगमगा सकी स्वामी विवेकानंद ने अपनी विचारधारा से युवाओं का मार्गदर्शन किया स्वामी विवेकानंद का संपूर्ण जीवन उनके संघर्ष और उनकी विचारधारा सैकड़ों की संख्या में युवाओं के लिए प्रेरणा स्त्रोत थी। स्वामी विवेकानंद को अमेरिका के शिकागो में आयोजित किए गए विश्व धर्म महासभा में भारत की ओर से सनातन धर्म का प्रतिनिधित्व करने का अवसर मिला था स्वामी विवेकानंद जी रामकृष्ण परमहंस के सहयोग शिष्य थे और उन्होंने ही रामकृष्ण मिशन की स्थापना की थी जो आज भी भली भांति जनहित के लिए कार्य कर रहा है।

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