एकल विद्यालयों की आचार्या बहने दे रही संस्कार युक्त शिक्षा : अंगद राही

Raebareli Uttar Pradesh प्रशिक्षण

आचार्या बहनो का दिवसीय वार्षिक अभ्यास वर्ग हुआ सम्पन्न

रायबरेली। शिवगढ़ क्षेत्र के सरस्वती शिशु मन्दिर शिवगढ़ में एकल विद्यालय अभियान के तहत आयोजित एकल विद्यालय की आचार्या बहनों का सात दिवसीय वार्षिक अभ्यास वर्ग सम्पन्न हुआ। अभ्यास वर्ग के अंतिम दिन मुख्य अतिथि के रूप में पत्रकार अंगद राही, विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे उत्तम बाजपेई ने संयुक्त रुप से मां सरस्वती की प्रतिमा पर पुष्प माला चढ़ाने के साथ ही दीप प्रज्ज्वलित कर अंतिम प्रशिक्षण दिवस की शुरुआत की। विदित हो कि ‘भारत लोक शिक्षा परिषद’ द्वारा संचालित एकल विद्यालय अभियान के तहत देश में एक लाख से अधिक एकल विद्यालय संचालित है। जिसमें उत्तर प्रदेश में 22 हजार से अधिक एकल विद्यालय संचालित है। एकल विद्यालय अभियान को 2017 में राष्ट्रपति द्वारा गांधी शांति पुरस्कार से सम्मानित किया जा चुका है। बताते चलें कि क्षेत्र के सरस्वती शिशु मंदिर शिवगढ़ में बीते 25 नवम्बर से 1 दिसम्बर तक शिवगढ़ और बछरावां संच की एकल विद्यालयों की 60 आचार्या बहनों का सात दिवसीय वार्षिक अभ्यास वर्ग चल रहा था। 7 दिनों तक चले अभ्यास वर्ग में आचार्या बहनो को नवीनतम शिक्षण तकनीकियों के साथ ही योग, व्यायाम, एकल गीत, वंदना का अभ्यास कराया गया एवं उनमें भारतीय सभ्यता और संस्कृति से ओतप्रोत विभिन्न संस्कारों का सृजन किया गया। मुख्य अतिथि के रुप में उपस्थित पत्रकार अंगद राही ने आचार्या बहनों को संबोधित करते हुए कहा कि जहां समूचे विश्व में भारतीय सभ्यता और संस्कृति की अलग पहचान है। जिसकी अन्य देशों के नागरिक नकल एवं सराहना करते हैं। वहीं देश में पाश्चात्य सभ्यता हावी होती जा रही है। भारतीय सभ्यता और संस्कृति को संरक्षण प्रदान करने के लिए सभी देशवासियों को अपना कर्तव्य निभाना होगा। एकल विद्यालय की आचार्या बहने भारतीय सभ्यता और संस्कृति से ओतप्रोत संस्कार युक्त शिक्षा देकर छात्र छात्राओं का सर्वांगीण विकास कर रही हैं जिसके लिए एकल विद्यालय संगठन और आचार्या बहनों की जितनी सराहना की जाए कम है। श्री राही ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि यदि “विद्यार्थी विद्यालय तक नहीं पहुंचता है,तो विद्यालय को विद्यार्थी तक पहुंचना होगा” बच्चों में स्वावलंबी स्वाभिमानी भाव जगाना है, चलो गांव की ओर हमें फिर से देश बनाना है।” स्वामी विवेकानंद की इस सोंच को एकल विद्यालय अमली जामा पहना रहे हैं। वहीं विशिष्ट अतिथि के रुप में उपस्थित रहे उत्तम बाजपेई ने अपने संबोधन में कहा कि ग्रामीण अंचल एवं पिछड़े क्षेत्रों में एकल विद्यालयों के संचालित होने से शिक्षा से वंचित एवं पिछड़े छात्र-छात्राओं को नि:शुल्क संस्कार युक्त शिक्षा मिल रही है। एकल विद्यालय छात्र छात्राओं के लिए वरदान साबित हो रहे हैं। वहीं अंचल अभियान प्रमुख संतोष कुमार, अंचल प्रशिक्षण प्रमुख प्रमोद साहू, अंचल कार्यालय प्रमुख अवनीश कुमार, अंचल गतिविधि प्रमुख धर्मेंद्र पाल, शिवगढ़ संच प्रमुख जितेंद्र सिंह, बछरावां संच प्रमुख बंसीलाल ने आचार्या बहनों को संबोधित करते हुए कहा कि सात दिवसीय आवासीय वार्षिक अभ्यास का मुख्य उद्देश्य आचार्या बहनों को नवीनतम शिक्षण तकनीकियों एवं नवीनतम पाठ्यक्रम से रुबरू कराना था। एकल अभियान का लक्ष्य है शिक्षित गांव, स्वस्थ गांव, संस्कारित गांव, जागरूक गांव एवं समर्थ गांव है। एकल अभियान ट्रस्ट द्वारा सेवाभाव से किए गए कार्यों के कारण पिछले दिनों संस्था को अंतर्राष्ट्रीय गांधी शांति पुरस्कार राष्ट्रपति रामनाथ कोविद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों प्राप्त हुआ, जो संस्था के लिए गर्व का विषय है। आचार्य भद्र पाल सिंह ने बताया कि एकल विद्यालयों के माध्यम से पंचमुखी शिक्षा दी जा रही है। हर एकल विद्यालय में एक आचार्या और करीब 30 या इससे अधिक बच्चे हैं। जिन्हे गांव-मोहल्ले के किसी निर्धारित स्थान पर शिक्षा दी जाती है। इसमें पहला प्राथमिक शिक्षा, दूसरा बच्चों में संस्कार प्रदान करना, तीसरा स्वास्थ्य जागरूकता, चौथा ग्रामीणों का कौशल विकास व पांचवां अहितकारों के प्रति जन जागरूकता है। इस मौके पर अनामिका, सुभाषिनी,रेेेशू सिंह, शिखा श्वेता आदि आचार्या बहने मौजूद रही।

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