अधिकारियों की उदासीनता के चलते हरियाली पर चल रहा आरा

Raebareli Uttar Pradesh अपराध

रायबरेली।जहां एक तरफ प्रदेश की योगी सरकार का फरमान है की एक पेड़ काटने के लिए एक व्यक्ति को कम से कम 10 पेड़ लगाने आवश्यक है। उसके बाद ही उसे काटने की अनुमति दी जाए, तो वहीं दूसरी तरफ जिम्मेदार अधिकारियों की उदासीनता के चलते कोतवाली क्षेत्र में हरे पेड़ों का कटान तेजी से हो रहा है।


वन माफिया बेखौफ होकर हरियाली पर आरा चला रहे हैं। इन दिनों वन माफियाओं का धंधा खूब फल-फूल रहा है। वन माफिया आए दिन फलदार आम, महुआ, नीम जैसे प्रतिबंधित पेड़ों की कटान कर उच्चाधिकारियों को खुलेआम चुनौती दे रहे हैं। जिम्मेदार व संबंधित अधिकारी जानबूझकर अनजान बना हुआ है जिससे साफ जाहिर होता है कि, प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा जुलाई माह में करोड़ों पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने जैसे कार्य को पलीता लगाने का काम कर रहे हैं।
क्षेत्र में हो रही अवैध लकड़ी के कटान की जानकारी उच्चाधिकारियों को क्या नहीं है ? या फिर जानबूझकर जिम्मेदार अनजान बने हुए हैं जिसकी चर्चा संपूर्ण क्षेत्र में जोरों पर है।


विदित हो कि, अपनी तिजोरियां भरने की लालसा में वनविभाग और संबंधित अधिकारियों की मिलीभगत से महराजगंज कोतवाली क्षेत्र के हलोर मऊ, पहरेमऊ, मोन, चंदापुर महराजगंज सहित अनेक क्षेत्रों में लकड़कटों की बाढ़ सी आ गई है। क्षेत्र के चर्चित ठेकेदार रामकुमार, राना, सतगुरु, नान्हा यादव, रंजीत सोनकर, संजय, रिंकू, बुग्गापासी सहित सैकड़ों लकड़ी ठेकेदार आए दिन नीम, आम, महुआ, जामुन जैसे प्रतिबंधित पेड़ों को कटाने का काम कर रहे हैं। जिसकी जानकारी वन विभाग सहित संबंधित उच्चाधिकारियों को भी रहती है।
क्या ? संबंधित विभागों के निचले स्तर से लेकर उच्चाधिकारियों तक की मिलीभगत के चलते ही क्षेत्र की हरियाली पर बेखौफ लकड़कट्टों द्वारा आरा चलाया जा रहा है ? या अनजान है ? या फिर जानबूझकर अनजान बने बैठे हैं ? ऐसे क्षेत्र की जनता यह कयास लगा रही है कि, प्रदेश की योगी सरकार को बदनाम करने व पलीता लगाने का काम यह ठेकेदार व अधिकारी कर रहे हैं। जिस पर योगी सरकार नाज करती है।


ग्रामीण राम भरोसे, शिवरतन, कल्लू, हौसिला प्रसाद, जगमोहन सिंह, राम लोटन, बाबू, सूर्य प्रकाश, राममिलन और जगेश्वर का कहना है कि, अगर यही स्थिति रही और इसी प्रकार से भारी तादाद में लकड़ कट्टों द्वारा हरियाली पर आरा चलाकर वृक्षों को तहस-नहस किया जाएगा तो, वह दिन दूर नहीं जब मानव स्वच्छ जलवायु और ऑक्सीजन के लिए तरसेगा।
ग्रामीणों ने तो यहां तक कह दिया कि, यही अधिकारी गांव में चौपाल लगाकर अपने लंबे चौड़े भाषणों के माध्यम से नसीहत देते हैं कि, एक वृक्ष लगाना सौ पुत्र के समान होता है लेकिन पैसे लालसा और खाली तिजोरियां भरने की हवस ने अपने पुत्र रूपी वृक्ष के बड़े हो जाने पर ये जिम्मेदार अधिकारी उसी पुत्र पर आरा चलवा देते है।
मामले में डीएफओ तुलसीदास शर्मा का कहना है कि, शिकायत मिली है जिसकी जांच कराई जा रही है। दोषी कर्मचारी व लकड़ी ठेकेदारों के खिलाफ जल्द से जल्द कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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