किस प्रकार करनी चाहिए सत्यनारायण व्रत व कथा

Shreesamachar : सभी प्रकार के मनवांछित फल को देने वाले श्री सत्यनारायण स्वामी कथा के महत्व और फल के बारे में जानते हैं अगर आप को नहीं मालूम है तो हमारे इस लेख को पढ़ें जिसकी पूजा विधि हमने संक्षेप में लिखकर कथा और महत्व के बारे में बताया है।

सत्यनारायण स्वामी की कथा व पूजा विधि

पूजा विधि महत्व के बारे में बताया है जिसे हिंदू धर्म में बहुत ही विधिवत सत्यनारायण स्वामी की कथा पूजा की जाती है स्कंद पुराण के विवाह खंड में सत्यनारायण व्रत कथा का बहुत ही महत्वपूर्ण वर्णन किया गया है जिस घर में सत्यनारायण व्रत कथा कहीं और सुनी जाती है उस घर में भगवान सत्यनारायण स्वामी का आशीर्वाद हमेशा बना रहता है जो कोई व्रत और कथा को श्रद्धा और भाव से सुनता और कहता है उसके सभी मनोरथ सिद्ध हो जाते हैं और उसके घर में अन्न धन जैसी कोई कमी नहीं रहती है यह व्रत कार्तिक माह प्रतिपदा से लेकर श्रवण मास की प्रतिपदा तक किया जाता है जो कि आप अपने घर में विशेष अवसर से लेकर बृहस्पतिवार शुक्रवार या फिर पूर्णिमा तिथि और संक्रांत तिथि को भी सत्यनारायण स्वामी का व्रत विशेष लाभ व फल बताया जाता है।

सत्यनारायण स्वामी की पूजा सामग्री ।

सवा किलो शुद्ध आटे की पंजीरी सवा किलो दही का पंचामृत सवा किलो बतासा पीला आसन का कपड़ा कच्चा नारियल सूखा नारियल पान सुपारी आम का पल्लव केले का पत्ता हवन सामग्री लौंग हल्दी काला तिल आटा की बेदी पीले फूल आम की लकड़ी घी गुड़ तुलसी की पत्ती आदि।

सत्यनारायण स्वामी व्रत कथा

विधि

सबसे पहले अपने घर के आंगन को पोछा लगाकर साफ करें और नहा धोकर पूजा की सभी तैयारियां करके रख लें और घर के एक सदस्य को जब तक कथा नहीं हो जाएगी तब तक व्रत रखना है और जब कथा पूरी समाप्त हो जाएगी तो प्रसाद खाकर व्रत को पूरा करना है सारी तैयारियां करने के बाद आप अपने पड़ोसियों को कथा सुनने का आमंत्रण देना चाहिए क्योंकि कथा कहने से ज्यादा कथा सुनने वाले को फल प्राप्त होता है इसलिए कभी बीच कथा से उठकर नहीं जाना चाहिए सत्यनारायण स्वामी की कथा किसी योग ब्राह्मण द्वारा श्रवण करनी चाहिए और ब्राह्मण को भोजन कराने के बाद दक्षिणा देकर विदा करना चाहिए ।

श्री सत्यनारायण व्रत कथा सत्यनारायण स्वामी कथा को जो कोई सत्य और निष्ठा श्रद्धा के साथ सुनता या फिर सुनाता है उस पर भगवान विष्णु की कृपा बनी रहती है भगवान विष्णु हमेशा उसकी रक्षा करते हैं सुनने और सुनाने वाले दोनों की ही हमेशा रक्षा करते हैं शास्त्रों में इस कथा का बहुत ही बड़ा महत्व बताया गया है जो कोई सत्यनारायण स्वामी की कथा अपने घर में कराता है उसे 10000 यज्ञ के बराबर फल मिलता है इस कथा में में बताया जाता हैं कि एक बार पृथ्वी लोक के मनुष्य के दुखों का विनाश करने के लिए नारद जी भगवान विष्णु के पास गए जो कि सागर में विश्राम कर रहे थे और माता लक्ष्मी भगवान विष्णु के चरणों को दबा रही थी तब नारायण नारायण का स्वर सुनकर श्री हरि ने नारद से उनके विष्णु लोक में आने का कारण पूछा तो नारद ने बताया हे.

प्रभु हमें पृथ्वी पर रहने वाले मनुष्यों को दुखों से मुक्ति पाने का कोई उपाय बताएं तब भगवान विष्णु ने नारद को बताया कि हे नारद पृथ्वी लोक में जो भी मनुष्य श्री सत्यनारायण स्वामी का व्रत व पूजन करेगा वह इस लोक में सुख भोग कर अंत में दुर्लभ मोक्ष को प्राप्त करेगा इस प्रकार श्री नारद जी ने श्रीहरि के मुख से फल वा व्रत जानकर स्कंद पुराण में बताकर सुखदेव मुनि ने व्रत व कथा जानकर नौमी सराय तीर्थ में अन्य ऋषि-मुनियों को भी बताया और कहा कि सत्यनारायण व्रत कथा करने वाले सभी मनुष्य के दुखों से मुक्ति पाकर अंत में दुर्लभ मोक्ष को प्राप्त होगा ।इस कथा में लकड़हारा धनवान सेठ लीलावती कलावती की कथा को सुनाया गया था कि किस प्रकार लीलावती ने श्री सत्यनारायण भगवान के प्रसाद को त्याग कर अनेकों दुखो का सामना करना पड़ा.

उनकी धन से भरी हुई नाव पानी में डूब गई और वह नदी के किनारे किस प्रकार मूर्छित होकर गिर पड़ी तब उनको स्मरण कराया गया कि हे पुत्री तुमने भगवान सत्यनारायण का प्रसाद का त्याग किया इसलिए तुम को यह दुख मिला और किस प्रकार गरीब लकड़हारा लकड़ी बेचकर एक धनवान सेठ बना और रानी का हार खूंटी से गायब होने के बाद किस प्रकार दुबारा प्राप्त हुआ सत्यनारायण स्वामी के पांचो अध्याय में सत्यनारायण स्वामी की कथा का वर्णन किया गया किस प्रकार इस कथा को करने से लोगों के दुखों और कष्टों से मुक्ति पाने का मार्ग मिला है।
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