कप्तान की कार्यशैली से बढ़ा जनता का भरोसा : ओ.पी. यादव

Raebareli Uttar Pradesh


● थाना प्रभारियों को एस.पी. से सीख लेने की आवश्यकता

● थाना महराजगंज व मिल एरिया में नामजद हत्या आरोपियों की नहीं की जा रही गिरिफ्तारी

● जगतपुर में हत्या मामले की विवेचना 10 माह से लम्बित

● खीरों पुलिस निर्दोषों को भेज रही जेल एक वर्ष से दौड़ रही पीड़िता का नहीं लिखा गया मुकदमा

● शिवगढ़ थाना क्षेत्र के बरजोर खेड़ा में हुई मासूम की हत्या का नही हुआ खुलासा

धैर्य शुक्ला

रायबरेली। सेन्ट्रल बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष पूर्व डीजीसी (फौ0) ओ.पी. यादव ने कहा कि लालगंज थाने में पुलिस हिरासत में हुई दलित युवक की हत्या पर जिस प्रकार से तत्कालीन एस.पी. व डी.एम. ने लीपा पोती करने का प्रयास किया, पैसे व पद के दबाव में मुकदमा नहीं लिखा गया। नये कप्तान ने निष्पक्ष कार्यवाही करके मुकदमा लिखाया। कप्तान की इस कार्यशैली की चारों ओर प्रशंसा हो रही है और कप्तान के प्रति जनता का भरोसा बढ़ा है। जिले के थाना प्रभारियों को कप्तान की निष्पक्ष कार्यशैली से सीख लेनी चाहिए। थाना महराजगंज कोतवाली पंजीकृत पंजीकृत अ0सं0-0372 सन् 2018 अ0धारा 302, 467, 468, 471, 406, 120बी आईपीसी में नामजद अभियुक्त जगदीप कुमार की गिरिफ्तारी अभी तक नहीं की गई है। जबकि जगदीप कुमार द्वारा मान्नीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद खण्ड पीठ लखनऊ में दायर याचिका में मिला स्थगन आदेश भी समाप्त हो चुका है। थाना मिल एरिया में पंजीकृत मुकदमा अ0सं0-621 सन् 2019 अ0धारा-302/506 आईपीसी में नामजद अभियुक्त अनिल सिंह की गिरिफ्तारी अभी तक नहीं की गई है। थाना जगतपुर में पंजीकृत मुकदमा अ0सं0-0396 सन् 2019 अन्तर्गत धारा-302 आईपीसी की विवेचना अभी तक लम्बित है, जबकि इसी थाने में पंजीकृत मुकदमा अ0सं0-0010 सन् 2020 अ0धारा-308/342/323/504/506 आईपीसी के नामजद अभियुक्तों से हत्या का मुकदमा जुड़ा हुआ है। थाना खीरों की पुलिस तीन दलित युवकों को अ0सं0-240 सन् 2020 अ0धारा-188, 269, 270 आईपीसी व 51 (1) (1ए) वन्य जीव संरक्षण अधिनियम में फर्जी ढंग से चालान कर दिया, जबकि तथाकथित जहर की शीशी की बरामदगी आज तक कहीं पता नहीं है। प्रयोगशाला में परीक्षण हेतु कच्ची शराब भेजने की बात आरोप पत्र में कही गई है। थाना खीरों श्रीमती ज्योति लोधी निवासी कमालपुर के साथ एक गांव के दबंग ने बलात्कार करने का प्रयास किया, पीड़िता एक वर्ष से दौड़ रही है। उसका मुकदमा नहीं लिखा गया, उल्टे उसके परिजनों पर दबाव बनाने के लिए दो फर्जी मुकदमें लिखकर पुलिस ने गुन्डा एक्ट की कार्यवाही कर दी। मुकदमों की लम्बी फेहरिस्त वाले व्यक्ति बड़ी-बड़ी गाड़ियों से घूमते हैं, उनके खिलाफ पुलिस कार्यवाही करने का साहस नहीं जुटा पाती है। दूसरी ओर एम एन.सी.आर. लिखकर निर्दोषों पर गुन्डा एक्ट की कार्यवाही की जाती है। श्री यादव ने नये कप्तान से अपेक्षा की है कि उनके सेवाकाल में निर्दोषों का उत्पीड़न बन्द होगा साथ ही अपराधियों पर अंकुश लगाया जायेगा।

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