खजुरों में भरभराकर मलवे में तब्दील हुआ आशियाना,बेघर हुआ परिवार

Raebareli Uttar Pradesh

● मलवे में दबकर गृहस्थी एवं राशन नष्ट

● दाने-दाने को मोहताज हुआ परिवार

● पात्र होते हुए भी नही नसीब हो सकी छत

अंगद राही / विपिन पाण्डेय

रायबरेली। सूबे की योगी सरकार गरीब पात्रों को आवास मुहैया कराने के दावे तो बड़े-बड़े करती है किन्तु जमीनी हकीकत कुछ और है। जिम्मेदार अधिकारियों की लापरवाही के चलते गरीब पात्रों को आजादी के 72 वर्ष बाद भी छत नसीब नही हो पा रही है। आपात्रों को योजनाओं का लाभ मिल रहा है और पात्र योजनाओं के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। अफसोस इस बात का है कि शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों के कान पर जू तक नहीं रेंगती। मामला शिवगढ़ थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत खजुरों का है। जहां रहने वाले मनोज कुमार पुत्र परीलाल के पूर्वजों की पीढ़ियां बीत गई किंतु गरीबी के चलते उन्हें पक्की छत नसीब नही हो सकी। वहीं पिछले 16 वर्षों से कच्चे जर्जर मकान में पत्नी राजकुमारी के साथ रह रहे मनोज कुमार ने ग्राम प्रधान से लेकर खण्ड विकास अधिकारी तक आवास के लिए कई बार प्रार्थना पत्र दिए किन्तु किसी ने इस गरीब परिवार के प्रार्थना पत्र पर ध्यान नही दिया। बारिश दिनों में मकान गिरने के डर से पीड़ित मनोज कुमार अपनी पत्नी राजकुमारी, 15 वर्षीय बेटे करन, 11 वर्षीय पुत्री पिंकी, 4 वर्षीय राधिका के साथ भोजन करने के पश्चात हमेशा खरफूस की बनी झोपड़ी के नीचे पड़ी एक चारपाई पर बैठकर अथवा लेटकर किसी तरह रात काटता था। आखिर वहीं हुआ जिस बात का डर था बृहस्पतिवार की देर शाम मनोज कुमार अपनी पत्नी और बच्चों के साथ भोजन करने के पश्चात परिवार के साथ जैसे ही झोपड़ी के नीचे गया मनोज का पूरा कच्चा आशियाना भरभरा कर मलबे में तब्दील हो गया। बताते यदि मनोज का परिवार 5 मिनट भी लेट हो जाता तो जो भयावह मंजर होता उसकी किसी ने कल्पना नहीं की होगी। बारिश के कहर से गिरे आशियाने के नीचे दबकर मनोज की पूरी गृहस्थी, खाने का सामान एवं कपड़े चौपट हो गए। मनोज की पत्नी राजकुमारी कुमारी ने बताया एक बिस्वा भी जमीन खेती करने लायक नही है। मेहनत मजदूरी ही परिवार की जीविका का सहारा है।जिसके चलते बच्चों की पढ़ाई लिखाई तो दूर की बात परिवार की जीविका चलाना भी किसी चुनौती से कम साबित नही होता। राजकुमारी ने बताया पिछले 4 वर्षों से आवास के लिए ग्राम प्रधान से लेकर बीडीओ की चौखट के चक्कर काट रहे हैं किंतु आवास नसीब नहीं हो सका। अंत्योदय राशन कार्ड की जगह पर पात्र गृहस्थी कार्ड बना है जिसके लिए भी कई बार प्रार्थना पत्र दिया गया किंतु किसी ने ध्यान नहीं। नायब तहसीलदार रामकिशोर वर्मा ने बताया कि हल्का लेखपाल शिवेंद्र रावत द्वारा तहसील रिपोर्ट भेजी गई है। पीड़ित परिवार को शासन की ओर से हर सम्भव मदद दिलाई जाएगी।

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