करें कुपोषण पर वार, छह माह के बाद बच्चों को दें ऊपरी आहार

Uttar Pradesh बुलन्दशहर

● छह माह तक केवल मां का दूध ही बच्चे के लिए पर्याप्त

● आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं ने दी माताओं को बच्चों की देखभाल और आहार संबंधी जानकारी

बुलंदशहर। राष्ट्रीय पोषण माह के तहत जनपद के समस्त आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों की सही देखभाल और उन्हें उचित आहार देने की जानकारी दी गई। इसके अलावा अभियान के तहत आंगनबाड़ी कार्यकर्ता घर-घर जाकर कुपोषण दूर करने के लिए अभिभावकों को ऊपरी आहार देने के लिए जागरूक कर रही हैं। गृह भ्रमण के दौरान कोविड प्रोटोकॉल का पालन किया जा रहा है।
जिला कार्यक्रम अधिकारी हरिओम बाजपेयी ने बताया राष्ट्रीय पोषण माह के तहत मंगलवार को जनपद के 3967 आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को ऊपरी आहार देने पर चर्चा हुई। छह माह से अधिक उम्र के बच्चों को मां के दूध के साथ पूरक आहार देने को लेकर बच्चों के माता-पिता को तमाम बातों की जानकारी दी गयी। उन्हें बताया गया कि जन्म के छह माह तक मां का दूध ही बच्चे के लिए सम्पूर्ण आहार माना जाता है। मां का दूध न केवल पचने में आसान होता है बल्कि इससे नवजात की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होती है, लेकिन छह माह के बाद सिर्फ स्तनपान से बच्चे के आवश्यक पोषण की पूर्ति नहीं हो पाती है। इसके बाद बच्चे के भोजन में अ‌र्द्धठोस व पौष्टिक आहार को शामिल करना चाहिए। शुरुआत में बच्चे को नरम खिचड़ी व मसला हुआ आहार दो-तीन चम्मच रोज दो से तीन बार दें। फिर नौ माह तक के बच्चों को मसला हुआ आहार, दिन में चार-पांच चम्मच से लेकर आधी कटोरी व दिन में एक बार नाश्ता, नौ-बारह महीने के बच्चों को अच्छी तरह से मसला हुआ आहार जो बच्चा अपनी अंगुलियों से उठा कर खा सके, देना चाहिए। इस उम्र के बच्चों को दिन में पौन कटोरी एक -दो बार नाश्ता तथा उतनी ही कटोरी भोजन तीन-चार बार देना चाहिए। 12 से 24 माह तक के बच्चों अच्छी तरह से से मसला हुआ ऐसा खाना जो कि परिवार के अन्य सदस्यों के लिए बनता हो देना चाहिए। इस आयु में बच्चे को कम से कम एक कटोरी नाश्ता दिन में एक से दो बार व भोजन तीन-चार बार दें।
संक्रमण से लड़ने के लिए पौष्टिक आहार जरूरी
पहले दो साल में जैसे-जैसे बच्चे बड़े होते हैं, वह खांसी, जुकाम दस्त जैसी बीमारियों के शिकार हो जाते हैं। बच्चे को इन सभी संक्रमणों से बचने और लड़ने के लिए पौष्टिक आहार की जरूरत होती है। यदि छगह माह के बाद बच्चा सही से ऊपरी आहार नहीं ले रहा है तो वह कुपोषित हो सकता है और कुपोषित बच्चों में संक्रमण आसानी से हो सकता है। बच्चे को ताजा व घर का बना हुआ आहार ही खिलाना चाहिए।

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