सेवायें बेचकर काली कमाई कर रहे स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी

Raebareli Uttar Pradesh स्वास्थ्य

दिवाकर त्रिपाठी

खीरों, रायबरेली। खीरों सीएचसी के अधीक्षक व स्टाफ ने मनमानी और भ्रष्टाचार की हद पार कर दिया है। चिकित्सक अस्पताल नहीं आते। सीएमओ साहब सुनते नहीं। कोरोना जैसी महामारी के दौर में भी भ्रष्टाचार और काम चोरी के लिए मशहूर हो चुके सीएचसी के डॉक्टर अपनी सुरक्षा के लिए सिक्योरिटी का इंतजाम रखते हैं। सिक्योरिटी में तैनात पुलिस या होमगार्ड के लोग इंसानियत निभाने और ड्यूटी देने के बजाय दादागिरी करते हैं। मरीजों को हड़का कर भगाते हैं। सीएचसी अधीक्षक फोर्स बुलाते हैं। शायद उन्हें अस्पताल में मरीजों का आना अच्छा नहीं लगता क्योंकि अधीक्षक स्वयं खीरों कस्बे में अवैध नर्सिंग होम चलवाकर झोलाछाप से महीना वसूली करते हैं। नवागत जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव से क्षेत्रीय लोगों ने सीएचसी में व्याप्त भ्रष्टाचार और बदहाली की जांच कराकर आम रोगियों को शासन के निर्देशानुसार स्वास्थ्य सेवायें सुलभ कराए जाने की मांग किया है।


खीरों सीएचसी में व्याप्त भ्रष्टाचार चरम पर है। सीएमओ डॉ संजय कुमार शर्मा व सीएचसी अधीक्षक डॉ भावेश सिंह की सांठगांठ से योगी सरकार में आम रोगियों को स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराये जाने की मनसा फिलहाल दूर की कौड़ी साबित हो चुकी है। सीएचसी में तैनात कई डॉक्टर व स्टॉफ के कुछ कर्मचारी बिना अस्पताल आये घर बैठे लंबे अरसे से वेतन ले रहे हैं। कोई भी महिला डॉक्टर सीएचसी मुख्यालय में नहीं रुकती। उनकी अनुपस्थिति में प्रसव सेवायें बेहद बुरे दौर में हैं। आए दिन कस्बे में खुले अवैध नर्सिंग होम व झोलाछाप के यहां जाकर गर्भवती महिलाओं व प्रसूताओं की मौतें हो रही हैं। ऐसे सभी केसों को स्वास्थ्य विभाग ने अपनी वसूली और काली कमाई का जरिया बना रखा है। एक महीने के भीतर ही हत्यारे झोलाछापों के कई मामले खुलने के बाद सीएचसी अधीक्षक ने 11 अवैध अस्पतालों की एक सूची जारी कर दी है। फिलहाल अभी ऐसे अस्पतालों के खिलाफ कोई जांच प्रक्रिया या कार्यवाही नहीं शुरू हुई है। झोलाछाप मरीजों की जान माल के साथ खुला खेल खेल रहे हैं स्वास्थ्य विभाग उनके इस खेल का सहभागी है। कस्बे के पाहो रोड पर स्थित अवैध नर्सिंग होम आर के चौधरी में पिछले एक माह के भीतर जिन दो प्रसूताओं की मौत के राज खुले हैं। उन दोनों को प्रसव से पहले परिजन सीएचसी लेकर गए थे। यह कहना गलत न होगा कि ‘डेथ पॉइंट’अर्थात ‘मौत का केंद्र बिंदु’ का रास्ता सीएचसी से होकर ही गुजरता है। उसी अवैध नर्सिंग होम के झोलाछाप ने सीएचसी अधीक्षक को महीना देने की बात कबूला था। जिसके बाद सीएचसी से लेकर ‘डेथ पॉइंट’ तक फैला भ्रष्टाचार रिश्वतखोरी व हत्या का काला कारनामा बेनकाब हो गया।सोमवार की दोपहर 12:00 बजे के लगभग सीएचसी का एक वीडियो वायरल हुआ। जिसमें अपनी मनमानी व भ्रष्टाचार के रास्ते में टांग अड़ाने वालों को रोकने के लिए सीएचसी अधीक्षक द्वारा लगाया गया पुलिस का इंतजाम दिख रहा है। । 15 अगस्त व रविवार लगातार दो दिन की छुट्टी के बाद इलाज के लिये सीएचसी पहुंचे रोगियों की संख्या होमगार्ड की हड़की के बाद कम पड़ गई। शायद सीएचसी अधीक्षक व अन्य डॉक्टर भी यही चाहते हैं।

बिना ड्यूटी के वेतन खीरों सीएचसी में मिलेगा।।

खीरों सीएचसी में कई महिला व पुरुष डॉक्टर के बिना अस्पताल आए वेतन लेने के बाद पाहो पीएचसी में तैनात महिला डॉक्टर सौम्या यादव का भी एक राज खुला है। वह भी ऐसी महिला डॉक्टर हैं जो बिना कभी अस्पताल गए वेतन ले रही हैं। वह सीएचसी के डॉ वरुण यादव की पत्नी हैं। सीएचसी की रामलली दाई पिछले 2 साल से घर बैठे वेतन ले रही है।
सीएचसी अधिक्षक डॉक्टर भावेश ने बताया कि मामला हमारे जानकारी मे नही है ।

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