न्याय के मंदिर में किया गया घोर अन्याय

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*न्याय के मंदिर में किया गया घोर अन्याय, अधिकारियों के वाहन खड़ा करने के लिए अधिवक्ताओं की कुर्सियाँ फेंकी गयीं,जब मुंसिफ ही कातिल बन जाए तो फरियाद किससे करें :ओ0पी0 यादव*

सन्दीप मिश्रा

रायबरेली । सेन्ट्रल बार एसोसिएशिन के पूर्व अध्यक्ष एवं पूर्व डीजीसी (फौ0) ओ.पी. यादव ने कहा कि मध्य रात्रि में न्याय के मंदिर घोर अन्याय किया गया। जब मुंसिफ ही कातिल बन जाए तो फरियाद किससे करें। दीवानी न्यायालय में बनी नयी बिल्डिंग में बेसमेन्ट में मोटर साइकिल पार्किंग व भूतल में कार पार्किंग की व्यवस्था की गयी है, लेकिन अधिकांश अधिवक्ताओं को बैठने के लिए परिसर में नहीं मिल रही जगह। कार पार्किंग दो भागों में बनायी गयी है। एक भाग में अधिकारियों के वाहन खड़े हो सकते हैं, एक भाग में अधिवक्ता बैठ रहे थे, लेकिन बिना अधिवक्ताओं को कोई नोटिस दिए मध्य रात में न्यायिक अधिकारियों ने अराजकतापूर्ण कार्यवाही करते हुए वाहन खड़ा करने के नाम पर अधिवक्ताओं की कुर्सी, मेज व तखत फेंकवा दिए। अधिकारियों के इस कृतय से मानवता शर्मसार हो गयी। कहा जाता है कि बार व बेंच एक ही सिक्के दो पहलू है। यह भी कहा जाता है कि एडवोकेट इस आफीसर आफ़ द कोर्ट। इसका अर्थ यही होता है बार व बेंच के सदस्य बराबर हैं, लेकिन यहाँ बिलकुल उल्टा कम हुआ बेंच के सदस्यों के वाहनों को छत के नीचे खड़ा करने के लिए अधिवक्ताओं के फर्नीचर छत के नीचे से बाहर फेंक दिये गये। अधिवक्ता इस बारिश में भीगते हुए न्यायिक कार्य करने को मजबूर हैं। मान्नीय उच्च न्यायालय इलाहाबाद के अधीनस्थ अधिकांश जिलों के न्यायालयों में बार व बेंच के सामान्जस्य न्यायिक कक्ष के बरामदों तक में अधिवक्ता बैठकर न्यायिक कार्य करते हैं, लेकिन रायबरेली जनपद में वाहन खड़ा करने के स्थान पर भी अधिवक्ताओं बैठने की अनुमति न देना यह दर्शाता है कि जनपद के न्यायिक अधिकारियों में प्रशासनिक क्षमता का अभाव है। श्री यादव ने मांग की है कि न्यायिक कार्य सुचारू रूप से सम्पन्न कराने के लिए दीवानी न्यायालय परिसर में अधिवक्ताओं को बैठने के लिए उचित स्थान आवंटित किया जाये। जब तक यह व्यवस्था नहीं होती उन्हें पहले की तरह यथावत बैठने दिया जाये।

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