महागठबंधन में कांग्रेस काे छाेड़कर चुनाव लड़ सकती हैं सपा-बसपा.

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यूपी में महागठबंधन की चुनावी रणनीति में कांग्रेस बाहर रह सकती है। माना यह जा रहा है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी 35 और बहुजन समाज पार्टी 40 सीटों पर लड़ सकती हैं। बाकी सीटें सहयोगी दलों के लिए छोड़ी जाएंगी। नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली बीजेपी के ‘विजय रथ’ को रोकने के लिए विपक्षी दलों की ओर से अब तक तीन ट्रायल किए गए हैं। विपक्ष को इन तीनों ट्रायल फार्मूले से बीजेपी को मात और विपक्ष को जीत का मंत्र मिला।

सपा के सूत्रों के अनुसार, उत्तर प्रदेश में बन रही विपक्षी एकता में कांग्रेस को यूं तो शामिल नहीं किया जाएगा, लेकिन राहुल गांधी और सोनिया गांधी की सीटें अमेठी और रायबरेली पर विपक्ष अपना उम्मीदवार नहीं उतारेगा। दरअसल, राज्य में कांग्रेस अपना आधार खो चुकी है। फूलपुर और गोरखपुर के लोकसभा उपचुनावों में अकेले लड़कर कांग्रेस के उम्मीदवारों को महज 19,353 और 18,858 वोट ही मिले।
सपा और बसपा नेताओं का मानना है कि कांग्रेस के पास अब न दलित वोट हैं, न पिछड़े और न ही अल्पसंख्यक। कांग्रेस को अधिकतर वोट सवर्णों के मिल रहे हैं जो भाजपा के भी वोट बैंक हैं। यानी कांग्रेस को मिल रहा हर वोट भाजपा के खाते से ही जा रहा है। यदि कांग्रेस विपक्षी एकता में शामिल हो जाती है तो ये सवर्ण भी भाजपा में चले जाएंगे। इसीलिए सपा-बसपा को लगता है कि कांग्रेस के अलग लड़ने से ही उन्हें ज्यादा फायदा है।

ब्यूरो श्री समाचार

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