ना लैपटॉप ना मोबाइल ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे कैसे करेंगे ऑनलाइन पढ़ाई

Raebareli Uttar Pradesh शिक्षा विभाग

प्रमोद राही

नगराम,लखनऊ। ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले गरीब व असहाय बच्चों के पास में न लैपटॉप है ना मोबाइल है इस लॉकडाउन के संकट में बच्चे कैसे करेंगे ऑनलाइन पढ़ाई कोरोना महामारी को देखते हुए सरकार द्वारा लगाए गए लॉकडाउन से ग्रामीण क्षेत्र के किसान वैसे भी आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं उन्हें अपनी दो वक्त की रोटी का जुगाड़ बड़ी मुश्किल से करना पड़ रहा है तो ऐसे में अभिभावक सरकारी व गैर सरकारी स्कूलों के छोटे-छोटे नौनिहाल बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई कैसे करा पाएंगे। कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण देशभर में लॉकडाउन है, ऐसे में सरकार ने ऑनलाइन पढ़ाई का रास्ता निकाला है। यह सरकार का एक अच्छा कदम है, लेकिन हालात ऐसे हैं कि नगराम क्षेत्र के बहुत से ऐसे गांव हैं, जहां नेट की प्रॉपर सुविधा नहीं है। बच्चों के पास लैपटॉप व स्मार्टफोन जैसे ऑनलाइन पढ़ाई करने वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरण नहीं है जिसकी वजह से ग्रामीण क्षेत्र के बच्चे ऑनलाइन पढ़ाई करने में असमर्थ है। जिससे ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों का भविष्य अंधकार की ओर जाता नजर आ रहा है। इंटरनेट की परेशानी होने के कारण ऑनलाइन हाजरी भरने के लिए शिक्षक को पेड़ पर चढ़ना पढ़ता है। तो ऐसे में ऑनलाइन पढ़ाई आखिर कैसे होगी। इतना ही नहीं दूर—दराज के क्षेत्रों में तो आज भी विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के पास स्मार्टफोन नहीं हैं, ऐसे में वे ऑनलाइन पढ़ाई कैसे करेंगे। नगराम क्षेत्र के गढ़ा ,असलम नगर, अमवा मुर्तजापुर, नबीनगर ,सुखलाल खेड़ा, हुसैनाबाद, करोरवा, गुलरिहा ,समेसी हरदोइया जैसे दर्जनों की संख्या में ऐसे गांव हैं जहां पर बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई के लिए उचित संसाधन उपलब्ध नहीं है जिससे बच्चों की ऑनलाइन पढ़ाई नहीं हो पा रही है और ग्रामीण क्षेत्र के अभिभावक अपने बच्चों की आनलाइन पढ़ाई को लेकर उनके भविष्य की चिंता सता रही है नगराम क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों में रहने वाले अभिभावकों का कहना है कि उनके बच्चों के पास लैपटॉप स्मार्टफोन जैसे ऑनलाइन पढ़ाई करने के संसाधन उपलब्ध नहीं है ।जिससे उनके बच्चों का भविष्य प्रभावित हो रहा है
लॉकडाउन में ऑनलाइन पढ़ाई को लेकर निजी स्कूल सरकारी स्कूल से काफी आगे हैं, निजी स्कूलों के बच्चों के पास जहां स्मार्टफोन, लैपटॉप, टैबलेट व अन्य इलेक्ट्रानिक डिवाइस हैं, वहीं सरकारी स्कूलों के बच्चों के पास ये सब नहीं हैं। इतना ही नहीं निजी स्कूलों ने तो ऑनलाइन क्लास भी कई दिनों पहले ही शुरू कर दी थी, जबकि बहुत से सरकारी स्कूलों में तो अभी तक आनलाइन पढाई शुरू नहीं हो सकी हैं। वहीं कई निजी स्कूलों के बच्चों के पास भी ऑनलाइन पढ़ाई के लिए संसाधन नहीं हैं।
नगराम क्षेत्र में दर्जनों सरकारी स्कूल हैं, जिसमें हजारों की संख्या में विद्यार्थी नामांकित हैं। इनमें से बहुत से विद्यार्थी ऐसे हैं, जिनके पास ऑनलाइन पढ़ाई के लिए कोई संसाधन नहीं हैं।
विभाग के पास बच्चों के नंबर ही नहीं है
सरकारी स्कूलों के शिक्षकों के पास बहुत से विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के नंबर ही नहीं है। ऐसे में आॅनलाइन पढ़ाई पर संकट आ गया है।

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