नवरात्रि विशेष : कैसे किया देवी माता ने राक्षसों का वध

कैसे किया माता ने राक्षसों का वध


धर्म संस्कृति डेस्क : कहा जाता है कि जब यह संसार दुरात्मा महिषासुर से अत्यंत परेशान था तब देवताओं ने एक देवी की उत्पत्ति की कहा जाता है कि जब पराक्रमी  दुरात्मा महिषासुर को मार गिराया और असुरों की सेना को माताजी ने मार गिराया था तब ब्रह्मा विष्णु शंकर सारे देवताओं ने हाथ जोड़कर अपने सिर शरीर को झुका कर मां भगवती का ध्यान करने लगे और सभी देवता जन कहने लगी कि मां भगवती अपनी शक्ति से इस जगत् को व्याप्त किया है जो संपूर्ण देवी देवताओं के लिए पूंजनी है और कहा जाता है कि उस अंबिका को हम सब भक्तों पूर्वक नमन करते हैं नमस्कार करते हैं मां हम सब का कल्याण करो और पृथ्वी पाताल लोगों का कल्याण को जो प्रभावशाली कार्य ब्रह्मा विष्णु महेश नहीं कर सके उस कार्य को मां चंडिका देवी ने अपने बलपूर्वक कर दिखाया और स्तुति की है.

देवी इस समस्त जगत का पालन करो और अशुभ भय का नाश करो और सभी पुण्य आत्माओं के घरों में तुम मां लक्ष्मी के रूप मैं वास और समस्त पापियों के घरों में तुम आ लक्ष्मी रूप और  में उत्पन्न होने वाले तत्व के लज्जा रूप होकर घरों में निवास करती हो हम तुम्हारे इस रूप का कोई वर्णन नहीं कर सकते हैं मां तुम असुरों का नाश करने वाली हो जब तुम्हारे इस  पराक्रम को देवी देवता नहीं समझ पाए हैं  हम तो अज्ञान रूपी आप के बनाए हुए पुतले हैं हम सब आपकी   समस्त शक्तियों को नहीं समझ सकते हे मां हम सभी  तो  अज्ञान रूपी आपके बनाए पुतले हैं हम सब की समस्त गलतियों को क्षमा करना और देवता कहने लगे कि हे देवी त्रिगुणात्मक आरी होने पर भी तुम संपूर्ण जगत् की उत्पत्ति का कारण हो  कहा कि हे देवी जब तुम्हें ब्रह्मा विष्णु शंकर  तुम्हारा पार नहीं पाया और तुम यह जगत संपूर्ण जगत तुम्हारा है.

 

और देवताओं ने कहा कि जिस नाम के उच्चारण से संपूर्ण यज्ञों में सब देवी देवता तृप्त हो जाते हैं लोग जानते हैं वह स्वाहा तुम ही हो और पितरों के उद्धार का कारण भी तुम हो इस विश्व की समस्त दुख पीड़ा को हरने वाली हो हे देवी जिस शास्त्रों को जाना जाता है वह महान शब्द तुम ही हो इस मनोहर कांति से कम नहीं है तुम्हारे मुख को देखकर महिषासुर और क्रोध में भर गया तब देवताओं को बड़ा आश्चर्य की है देवी तुम्हारा यही मुख चंद्रमा की भांति लाल हो गया और  तुम्हारी तनी हुई भाव होके कारण तुम्हारा विकराल रूप हो गया तुम्हारे उस रूप को देखकर महिषासुर के अति शीघ्र प्राण  निकल गए.

तब देवताओं को बड़ा आश्चर्य हुआ कि  माता के उचित रूप को देखकर भला कौन जीवित रह सकता है इस प्रकार से मां भगवती उनका महिषासुर का वध किया और समस्त देवताओं की रक्षा की कहा जाता है कि देवताओं की और पृथ्वी जन की रक्षा करने के लिए ही माता ने इस धरती पर चंडिका रूप में अवतार लिया था और समस्त  असुरों का भी वध करके लोगों की रक्षा की.

इंद्र आदि  देवताओं के द्वारा कैसे की गई देवी की स्तुति

जय मां भगवती कहा जाता है कि जब पराक्रमी दुरात्मा महिषासुर को मार गिराया और अवसरों की सेना को माताजी ने मार दिया तब ब्रह्मांड में के सारे देवताओं ने हाथ जोड़कर अपने सिर्फ शरीर को झुका कर मां भगवती का ध्यान करने लगे और सभी देवता जन कहने लगे कि हे मां भगवती अपनी शक्ति से इस जगत् को व्याप्त किया है जो संपूर्ण देवी देवताओं के लिए पूंजनी है और कहा जाता है कि उस समय अंबिका को हम सब भक्ति पूर्वक नमन करते हैं नमस्कार करते हैं मां हम सब का कल्याण करो पृथ्वी और पाताल के सभी देवी देवताओं का भी कल्याण को जो प्रभावशाली कार आपने किया है वह ब्रह्मा विष्णु शंकर भी नहीं कर सके उस कार्य को मां चंद्रिका देवी ने अपने बलपूर्वक कर दिखाएं और स्थित की हे देवी समस्त जगत का पालन करो और असुरों का नाश करो और सभी पुण्यात्मा को घरों में पुण्य आत्माओं के घरों में तुम मां लक्ष्मी के रूप में बस करो समस्त साथियों के घरों में तुम आ लक्ष्मी रूप और कुल में उत्पन्न कुल में उत्पन्न होने वाली उम्र रूप होकर घरों में निवास करती हो हम तुम्हारे इस रूप का कोई वर्णन नहीं कर सकते हैं.

तुम तो असुरों का नाश करने वाली है जगत जननी जब तुम्हारे परिवार को देवी देवता नहीं समझ पाए हैं तो हम अज्ञान रूपी अंधकार रूपी मनुष्य आपके बच्चे हैं हम इस सीमा को कतई नहीं समझ सकते हेमा हमारी समस्त अतिथियों को क्षमा करना और देवता दिन कहने लगे कि हे देवी त्रिगुणात्मक आरी होने पर भी तुम संपूर्ण जगत की उत्पत्ति का कारण हो देवताओं देवताओं की देवताओं को ब्रह्मा विष्णु शंकर जब तुम्हारा पार नहीं पाए और तुम और यह संपूर्ण जगत मारा है और देवताओं ने कहा है जो भी साथी इस नाम के उच्च संपूर्ण जगत में सब देवी देवता लोग करते हैं वह तुम हो और पितरों के उद्धार का कारण भी तुम हो इस विश्व की समस्त दुख पीड़ा को हरने वाली और है देवी जी शास्त्रों को जाना जाता है वह महान शब्द तुम ही हो इस मनोहर कांति से कम नियत तुम्हारे मुंह को देखकर महिषासुर और गोद में भर गया तब देवताओं को बड़ा आश्चर्य की हे देवी तुम्हारा यही मुख चंद्रमा की भांति लाल हो गया और तुम्हारी सभी तुम्हारी तनी भावों के कारण तुम्हारे विकराल मारा विकराल रूप हो गया तुम्हारे उस विकराल रूप को देखकर महिषासुर के प्राण अति शीघ्र निकल गए तब देवताओं को बड़ा आश्चर्य हुआ कि माता इस उसको पुत्र रूप को देखकर भला कौन जीवित रह सकता है इस प्रकार से मां भगवती ने महिषासुर का वध किया और समस्त देवताओं की रक्षा की रक्षा करने के लिए माता ने इस धरती पर मां अंबिका के रूप में शुंभ निशुंभ का वध करके समस्त लोगों की रक्षा की.

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