सुहागिनों ने विधि विधान पूर्वक की वट सावित्री की पूजा

Raebareli Uttar Pradesh धार्मिक

डलमऊ,रायबरेली। जेष्ठ माह की अमावस्या पर पतियों की दीर्घायु के लिए वट सावित्री की विधिवत पूजा अर्चना की। जेष्ठ माह की अमावस्या के शुभ अवसर पर आसपास के क्षेत्रों से श्रद्धालु गंगा नदी में स्नान करने के लिए आए हुए थे। गंगा नदी में स्नान कर सुहागिनों ने अखंड सौभाग्यवती की प्राप्ति के लिए व्रत रखा मान्यता है जो पत्नी सच्चे मन से अपने पति की दीर्घायु के लिए यह व्रत रखती है उसे इसका फल अवश्य मिलता है। शुक्रवार को गंगा नदी में स्नान करने के बाद आए श्रद्धालुओं ने देवी देवताओं के मंदिरों में पूजा-अर्चना भी की वहीं पथवारी घाट पर स्थित प्राचीन बरगद के पेड़ पर सुहागिनों ने विधिवत पूजा-अर्चना भी की है। वट सावित्री की पूजा से पूर्व सुहागिनों ने सर्वप्रथम मौसमी फल, चढ़ावे के लिए पकवान ,बांस का पंखा, रोली चंदन, गंगाजल सहित विभिन्न सामग्रियों से बरगद देव को प्रसन्न किया उसके पश्चात विधिवत पूजा-अर्चना भी की। ज्येष्ठ मास के व्रतों में वट अमावस्या का व्रत बहुत प्रभावी माना जाता है ।जिसमें सौभाग्यवती स्त्रियां अपने पति की लंबी आयु एवं सभी प्रकार की सुख-समृद्धियों की कामना करती हैं। इस दिन स्त्रियां व्रत रखकर वट वृक्ष के पास पहुंचकर धूप-दीप नैवेद्य से पूजा करती हैं। तथा रोली और अक्षत चढ़ाकर वट वृक्ष पर कलावा बांधती हैं। साथ ही हाथ जोड़कर वृक्ष की परिक्रमा लेती हैं। जिससे पति के जीवन में आने वाली अदृश्य बाधाएं दूर होती हैं, तथा सुख-समृद्धि के साथ लंबी उम्र प्राप्त होती है।हिंदू धर्म के अनुसार वटवृक्ष के नीचे सावित्री ने अपने पति व्रत की प्रभाव से मृत पड़े सत्यवान को पुनः जीवित किया था। तभी से इस व्रत को वट सावित्री नाम से ही जाना जाता है। इसमें वटवृक्ष की श्रद्धा भक्ति के साथ पूजा की जाती है। महिलाएं अपने अखंड सौभाग्य एवं कल्याण के लिए यह व्रत करती हैं।

Total Page Visits: 70 - Today Page Visits: 1

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *