रमजान के पाक महीने में छोटे-छोटे बच्चे भी करोना को हराने के लिए मांग रहे दुआएं

Raebareli Uttar Pradesh

डलमऊ,रायबरेली। माहे रमजान में जहां पूरे देश में लोग सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए अपने-अपने घरों में इबादत कर रहे हैं, वहीं छोटे-छोटे बच्चे भी इबादत करने से पीछे नहीं हट रहे हैं। इस्लामिक मान्यता के अनुसार 610 ईस्वी में पैगंबर मोहम्मद साहब लेलतुल कद्र के मौक़े पर पाक कुरान शरीफ नाजिल हुई थी,तब से रमजान माह को इस्लाम के पाक माह में लोग इस महीने में इबादत बेशुमार करते हैं। माहे रमजान में रोजा रखना हर मुसलमान का फर्ज होता है। रोजा रखने से पहले रोजेदार शहरी करते हैं। शहरी करना सुन्नत है तो वहीं दिन भर रोजा रखने के बाद शाम के समय मगरिब के दरमियान रोजेदार इफ्तार करते हैं। छोटे-छोटे मासूम भले ही रोजा नहीं रखते हैं। लेकिन अपने घरवालों को देखकर इबादत और तिलावत में पीछे नहीं रहते है। नन्हे मुन्ने बच्चे कोरोना जैसी महामारी को खत्म होने के लिए दुवाओं के लिए हाथ उठा रहे है। जहां लोग माहे रमजान में पूरे महीने नमाज़ के दौरान इबादत और दुवाओं के लिये हाथ उठा रहे है वहीं मगरिब के दरमियान इफ्तार के वक्त सभी लोग घरों में इफ्तार से पहले अल्लाह रब्बुल आलमीन से देश के खातिर अमन चैन और खुशहाली के लिए दुआ भी मांग रहे हैं।

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