।। स्वाधीनता ।।

पराधीनता के बंधन मे, जब जकड़ा देश हमारा था । अस्तित्व सब भूले थे अपना, बेबस बन ही बस जीना था ।। ये जन्मभूमि थी हम सबकी, पर अधिकार हमारा छीना था । सहमा सा हो गया था जीवन, बस डर-डर के ही जीना था ।। दो वक्त की न मिलती रोटी, बस अत्याचार ही […]

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।। वेदना ।।

निस्तब्ध परिवेश मे सहसा, एक करुण ध्वनि आ गूंजी । घुला ह्दय बन नीर बहा, वह पुकार जैसे जलती ।। शिथिल विश्रृंखल केश उसके, जैसे कोई मुरझाई हो कली । आह निकलती है ह्दय से, खूब छला है नियति – नटी ।। अरे बतादे मुझे दया कर, क्या हुआ है हे बटोही । कहां भटकते […]

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सागर सी गहराई होती है मन में….

अंतर्राष्ट्रीय मेंस डे है पुरुष किस तरह से अपनी समस्याओं के साथ शालीनता को बनाकर रखता है और अपने परिवार को चलाता है ऐसे ही संघर्षशील पुरुषों के लिए उन्हें सम्मान देने के लिए कवित्री कल्पना अवस्थी ने कविता के माध्यम से उनकी सराहना की है। पंकज गुप्ता.. सागर सी गहराई होती है मन में […]

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दूरी बना के रखना कोरोना न हो जाये, फूले फले परिवार को रोना न हो जाये।।

जागरुकता संदेश… दूरी बना के रहना कोरोना न हो जाये फूले फले परिवार को रोना न हो जाये ।। चाइना की चाल है या कुदरती लीला विश्व के पंजर को इसने कर दिया ढीला बरपा हैइस जहान पे बनकरके यह कहर सप्ताह भर मे प्राणघाती बनता है जहर अपनो को भी कहीं मुझे खोना न […]

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कर्तव्य

मोह मेंं मत बांधों मुझको, रिश्तो की मत दो दुहाई । शीघ्र मुझको जाना है, याद कर रही भारती माई ।। सिसक रही है भारत माता, रो रही लाश की ढेरो पर । त्रास उनका हरना है , चाहे चलना हो अंगारे पर ।। नित्य ही कई मांओ का, बेटा शहीद हो जाता है । […]

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देशप्रेम

रहा जो निराकार हदय मे, उत्कृष्ट उसको होने दो । उन्मनन गुंज से सज सजकर, जयकार भारत की लगाने दो ।। उतनी जो रेखा करे पार, फटकार उसको लगाने दो । भारत पर कुदृष्टि जो उठाए , खंडन उसका करने दो ।। देशप्रेम की सुकोमल ज्योति, हदय मे मेरे जलने दो । उद्दाम हमारी धरती […]

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